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मेरठ में 8 जुलाई को कलक्ट्रेट परिसर के बाहर जाम लगाने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए सभी आठ प्रदर्शनकारियों को जमानत मिल गई है। पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद उनके परिवारों की तरफ से कोर्ट में जमानत याचिका लगाई गई थी, जिसे सोमवार को स्वीकार कर लिया गया। मंगलवार को सभी आठों प्रदर्शनकारियों के जेल से बाहर आने की संभावना जताई जा रही है। रोहटा थाना क्षेत्र के थिरोट गांव की 20 वर्षीय ललिता गौतम बीए तृतीय वर्ष की छात्रा थी। वर्तमान में वह परिवार के साथ टीपी नगर थाना क्षेत्र के गगन एनक्लेव में किराए पर रह रही थी। 15 मई को परीक्षा देने के लिए घर से निकली लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी। परिजनों ने उसकी तलाश की मगर उनका कोई पता नहीं चला। 16 मई को परिवार ने दर्ज कराई गुमशुदगी
परिजनों ने 16 मई को थाना टीपी नगर में गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने जांच पड़ताल शुरू की और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में ललिता गांव कल्याणपुर निवासी अंकुश चौधरी नाम के युवक के साथ दिखाई दी। अंकुश चौधरी को किया गया गिरफ्तार
पुलिस ने अंकुश को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने ललिता की हत्या करने की बात कबूल कर ली। पुलिस ने बताया कि अंकुश और ललिता के बीच दोस्ती थी। घटना वाले दिन दोनों साथ थे। इसी दौरान आरोपी ने ललिता के मोबाइल फोन में कुछ फोटो और चैट देखीं, जिसके बाद उसे शक हुआ। इसी शक के चलते आरोपी ने ललिता की हत्या कर दी और शव को मेरठ के रोहटा थाना क्षेत्र के उकसिया में गन्ने के खेत में फेंक दिया और पुलिस ने शव बरामद कर लिया। कलक्ट्रेट के बाहर लगाया जाम
इस मामले में अंकुश के भाई पीएसी में तैनात अंकित समेत दो लोगों की गिरफ्तारी की आवाज उठने लगी। 8 जुलाई को छात्रा की हत्या के विरोध में बड़ी संख्या में लोग कमिश्नरी और फिर कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रवेश ना मिलने पर उन्होंने कलेक्ट्रेट के बाहर जाम लगा दिया। इसी दौरान एसएसपी अविनाश पांडेय वहां पहुंच गए और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को थप्पड़ मारते हुए दौड़ा लिया। आठ लोगों रवि कुमार गौतम, दिग्विजय भाटी, रितिक, लवी उर्फ शुभम, अरविंद कुमार, अंकित कुमार, हिमांशु सिद्धार्थ और नवनीत कुमार को गिरफ्तार करते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। कोर्ट ने सभी को जेल भेज दिया। चौतरफा निंदा के बाद जागी पुलिस
इस घटना की चौतरफा निंदा शुरु हो गई। सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने सरकार की नीति पर सवालिया निशान लगा दिया। कई पूर्व आईपीएस ने पुलिस खासकर एसएसपी अविनाश पांडेय की थप्पड़ की कार्रवाई को गलत बताया। आसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी 20 तक जमानत ना मिलने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दे दी थी। किरकिरी के बाद बैकफुट पर पुलिस
इस मामले ने पुलिस की खासी किरकिरी कराई। चौतरफा निंदा के बाद पुलिस ने नये सिरे से जांच शुरु की तो पता चला कि प्रदर्शनकारी जिस अंकित चौधरी की गिरफ्तारी की मांग उठा रहे थे, वह वारदात वाले दिन मेरठ में ही थी। इसके बाद उसे मुरादाबाद पीएसी से पुलिस गिरफ्तार कर मेरठ ले आई और कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने अंकित को जेल भेज दिया। चार्जशीट भी पुलिस की तरफ से दाखिल की गई। धारा हटते ही मिली जमानत
अंकित की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अपनी गलती में सुधार किया। पुलिस सूत्र बताते हैं कि मुकदमे से गंभीर धाराओं को हटा दिया गया। इससे जेल भेजे गए आठों लोगों की जमानत की संभावना प्रबल हो गई। सोमवार को कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। बचाव पक्ष ने हटाई गई धाराओं का जिक्र किया, जिसके बाद सभी आठ लोगों की जमानत मंजूर कर ली गई।
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बवाल के आठों आरोपियों को कोर्ट से मिली जमानत:मुकदमे से गंभीर धाराएं हटाने की चर्चा, मंगलवार को आ सकते हैं जेल से बाहर