बरेली में साइबर अपराधियों का बड़ा नेटवर्क हुआ ध्वस्त:15 शातिर अपराधी पुलिस के हत्थे चढ़े, ऑपरेशन 'Cy-वज्र' के तहत 80 लाख की साइबर धोखाधड़ी का भंडाफोड़


बरेली पुलिस ने ‘ऑपरेशन Cy-वज्र’ के अंतर्गत साइबर अपराधियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पिछले पांच दिनों से चल रहे इस सघन अभियान के दौरान पुलिस की संयुक्त टीमों ने 15 शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। इन अपराधियों के खिलाफ एनसीआर पोर्टल (NCRP) पर पहले से ही 38 से अधिक गंभीर शिकायतें दर्ज थीं। पुलिस ने इनके पास से 13 अत्याधुनिक मोबाइल फोन, 19 एटीएम कार्ड और संदिग्ध चेकबुक बरामद की हैं। शुरुआती जांच और पूछताछ में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इन अपराधियों ने महज कुछ समय में ही देश के विभिन्न हिस्सों से 80 लाख रुपये से अधिक की अवैध धनराशि अपने बैंक खातों में ट्रांसफर की थी, जिसे बाद में अलग-अलग माध्यमों से निकालकर आपस में बांट लिया गया। एसएसपी के निर्देश पर संयुक्त टीमों की प्रभावी घेराबंदी
एसएसपी अनुराग आर्य के सख्त निर्देश पर एसओजी (SOG), साइबर सेल, साइबर थाना और जनपद की विभिन्न थानों की पुलिस टीमों ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया। यह संगठित अपराधी गिरोह महाराष्ट्र, बिहार, तेलंगाना, कर्नाटक, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों के निवासियों को अपना निशाना बनाकर साइबर फ्रॉड को अंजाम दे रहा था। बरेली के प्रमुख थाना क्षेत्रों जैसे इज्जतनगर, बारादरी, सीबीगंज, भुता, भोजीपुरा, भमोरा, बहेड़ी, देवरनिया और फतेहगंज पूर्वी में इन ठगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस की इस समन्वित कार्रवाई ने साइबर अपराधियों के नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। हवाला और अवैध धन का काला कारोबार
गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में पकड़े गए अपराधियों ने चौंकाने वाले तौर-तरीके बताए हैं। बारादरी निवासी विशाल गंगवार (19) ने स्वीकार किया कि वह देश के दूरदराज के लोगों को साइबर फ्रॉड का शिकार बनाकर पैसा अपने खातों में मंगवाता था। वहीं, फतेहगंज पश्चिमी के वारिस और राशिद खान के खातों से 76 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन की पुष्टि हुई है। ये अपराधी न केवल फोन हैक कर, ओटीपी (OTP) चुराकर या लिंक भेजकर लोगों के बैंक खाते खाली करते थे, बल्कि इन खातों का इस्तेमाल हवाला के पैसे के अवैध लेनदेन के लिए भी किया जा रहा था। यह साफ है कि ये अपराधी केवल ठगी ही नहीं, बल्कि वित्तीय अपराधों के एक बड़े तंत्र का हिस्सा बन चुके थे। भोले-भाले लोगों को बनाते थे निशाना
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के सदस्य नीलेश और यश गंगवार जैसे अन्य साथी भोली-भाली जनता को बहला-फुसलाकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। वे लोगों से क्यूआर कोड स्कैन करवाकर या आधार का झांसा देकर पैसा अपने खातों में ट्रांसफर करवाते थे। पुलिस ने इनके पास से जो डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं, उनमें आधार विवरण और पैन कार्ड से जुड़ी अन्य जानकारियां भी मिली हैं। फिलहाल, सभी 15 आरोपियों को पुलिस कस्टडी में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के मास्टरमाइंड और अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके। पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात लिंक या अनजान व्यक्ति को ओटीपी न दें। इन थाना क्षेत्रों से हुई साइबर ठगो की गिरफ्तारी
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गिरफ्तार किए गए अपराधियों में थाना बारादरी से विशाल गंगवार, थाना भुता से वारिस और राशिद खान, थाना भोजीपुरा से नीलेश और यश गंगवार, थाना फतेहगंज पूर्वी से प्रमोद कुमार गुप्ता शामिल हैं। इसके अलावा थाना भमोरा से मोहम्मद अयाज, मुसाहिद, साहब हुसैन, असलम और फैजान को पकड़ा गया है। थाना इज्जतनगर से मोहम्मद शाहिद, थाना सीबीगंज से मोहम्मद फैज, थाना बहेड़ी से आदर्श कुमार और थाना देवरनिया से राम सिंह को गिरफ्तार किया गया है। इन सभी अपराधियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कर उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है। जहां से सभी को जेल भेज दिया गया।

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