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बरेली में एसआरएमएस रिद्धिमा में रविवार शाम दूधनाथ सिंह लिखित तथा अम्बुज कुकरेती और विनायक श्रीवास्तव निर्देशित नाटक का मंचन हुआ। कथा युवराज पुरूरवा के राज्याभिषेक की तैयारियों से शुरू होती है। पुरूरवा परंपरागत राजसत्ता और धार्मिक कर्मकांडों को शोषण व रक्तपात से जोड़ते हुए स्वीकार करने से इनकार करता है। इसी वैचारिक टकराव के चलते पुरोहित विभावक और कश्यप इंद्र के साथ मिलकर उसके खिलाफ षड्यंत्र रचते हैं। महर्षि वशिष्ठ पुरूरवा के विचारों का समर्थन करते हैं, जबकि इला अपने अस्तित्व और स्त्री पहचान के अस्वीकार किए जाने पर सवाल उठाती है। उर्वशी का चरित्र भी पारंपरिक अप्सरा की छवि से अलग नजर आता है। पुरूरवा जनता से बलपूर्वक लिए जाने वाले संसाधनों और लूट की व्यवस्था खत्म करने की बात करता है। सत्ता के खिलाफ संघर्ष का मंचन पुरूरवा के विरोध को दबाने के लिए ‘पुरुषमेध’ की तैयारी होती है और अंत में उसका वध कर दिया जाता है। पुरूरवा की भूमिका पंकज कुकरेती और इंद्र की भूमिका संजय सिंह ने निभाई। चंपा उपाध्याय, सोनालिका सक्सेना, सोहम तिवारी, इल्हाम, विनायक श्रीवास्तव समेत कलाकारों ने अभिनय किया। देव मूर्ति, आशा मूर्ति, आदित्य मूर्ति, ऋचा मूर्ति, उषा गुप्ता और गुरु मेहरोत्रा मौजूद रहे।
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बरेली में पुरूरवा के संघर्ष का मंचन:एसआरएमएस रिद्धिमा में सत्ता और परंपरा के टकराव को दिखाया