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चिगरु कल्चरल एंड चेरिटेबल ट्रस्ट बंगलुरु के द्वारा भरतनाट्यम् के जरिए सम्पूर्ण राम कथा का मनमोहक चित्रण किया गया। इस अवसर पर यहां 270 महिला व बाल नृत्यांगनाओं की अलग-अलग 16 टीमों ने भगवान राम का परिचय व उनके अवतरण के हेतु के साथ रामजन्म व उनकी बाल लीलाओं का प्रदर्शन किया।
पुनः राम विवाह से लेकर वनवास, सीता हरण से लंका विजय और फिर राम-भरत मिलाप के साथ पट्टाभिषेक समारोह तक आयोजन नृत्य नाटिका से किया।
इस प्रस्तुति के दौरान नृत्यांगनाओं की वेशभूषा, भाव भंगिमा व चपलता के लय-ताल के साथ की गयी प्रस्तुति ने उपस्थित समूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुबह नौ बजे से लेकर सायंकाल चार बजे तक अनवरत छह घंटे की प्रस्तुति ने उनकी क्षमता और समर्पण के साथ भक्ति का अनूठा संगम भी देखने को मिला। राम मंदिर में रामलला का विलक्षण दर्शन मिला संस्था की निदेशक संतोषी जो कि खुद एक प्रतिष्ठित नृत्यांगना है, ने बताया कि केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से हमारे ट्रस्ट से जुड़कर कर्नाटक प्रदेश के कलाकार देश के सभी पवित्र तीर्थों पर अपनी नृत्य कला की सेवा देने के लिए अयोध्या आई है। उन्होंने बताया कि हम सबको राम मंदिर में रामलला का विलक्षण दर्शन प्राप्त हुआ। श्रीराम का बाल रूप मन मोहने वाला है उन्होंने कहा कि यहां आने के पहले हमने टीवी समाचारों में देखा सुना था लेकिन पहली लड्डू गोपाल के रूप में रामलला का दर्शन कर हम सभी अभिभूत हैं। रामलला से यही प्रार्थना करती हूं सभी देशवासियों और विशेष रूप से कलाविदों पर उनकी कृपा बरसती रहे। इस मौके पर आडीटोरियम की संचालक संस्था जियो स्पार के कार्यकारी निदेशक आशीष सैनी, निदेशक तुषार गोयल, प्रबंधक रजनीश प्रताप मिश्र व संस्कृति विभाग के सेवानिवृत्त लेखाकार राम तीरथ सहित अन्य नृत्यांगनाओं के परिजन मौजूद रहे।
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बंगलुरु के 270 कलाकारों ने अयोध्या में भरतनाट्यम किया:श्रीरामजन्म से लेकर राजगद्दी के प्रसंगों तक 16 टीमों ने 5 घंटों तक किया मंचन