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प्रयागराज में आइसा व दिशा छात्र संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध मार्च निकाला। इस दौरान संगठन ने निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव की बहाली, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द कर पुराने वोटर लिस्ट से चुनाव कराने की मांग की । रैली इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन से शुरू होकर लक्ष्मी चौराहा होते हुए कचहरी स्थित एडीएम सिटी कार्यालय पहुंचा। छात्र संगठनाें ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया से देश की बड़ी आबादी को नागरिकता और मताधिकार के संकट में धकेला जा रहा है। संगठन ने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते और SIR रद्द नहीं होता तब तक संघर्ष जारी रहेगा। वोटर लिस्ट पर उठाए सवाल संगठन का दावा है कि देश में 2024 तक कुल 96.88 करोड़ मतदाता थे, लेकिन SIR के तहत लगभग 13.37 करोड़ यानी करीब 14 प्रतिशत नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। संगठन ने कहा कि इससे हर सात में से एक मतदाता प्रभावित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए फार्म-6 में आधार, पैन, राशन कार्ड, बैंक खाता और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेजों की स्वीकृति में कठिनाई पैदा की गई है। साथ ही 2002 की वोटर लिस्ट में माता-पिता के नाम का प्रमाण मांगने की नई शर्त से गरीब और वंचित वर्ग के मतदाताओं को सबसे अधिक नुकसान होगा। चुनाव आयोग पर आरोप छात्र संगठन ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नए फार्म-6 में बदलाव एकतरफा किया गया। संगठन के अनुसार, दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों ने इस पर आपत्ति जताई, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। संगठन ने दावा किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची से नाम हटाने, नए मतदाताओं के पंजीकरण तथा उन्हें पुनः शामिल करने से जुड़े मुद्दों पर 10 महीनों में 14 आपत्तियां दर्ज कराई थीं। निरंतर संघर्ष की घोषणा कार्यक्रम में संगठन ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा और मताधिकार की सुरक्षा के लिए छात्र-युवा सड़कों पर संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने सरकार पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शनों पर रोक लगाने का भी आरोप लगाया और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया।
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प्रयागराज में छात्र संगठनों ने निकाला विरोध मार्च:CEC के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग