प्रभारी मंत्री ने बाढ़ तैयारियों की समीक्षा की:संभावित बाढ़ से निपटने के लिए दिए जरूरी निर्देश, 60 राहत शरणालय बनें


शाहजहांपुर में शनिवार शाम करीब 5 बजे प्रभारी मंत्री नरेंद्र कश्यप ने विकास भवन सभागार में बाढ़ संबंधी तैयारियों की समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को संभावित बाढ़ से निपटने के लिए सभी जरूरी तैयारियां समय से पूरी करने और राहत-बचाव व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए। अगले एक सप्ताह बाढ़ का विशेष जोखिम नहीं बैठक में अधिशासी अभियंता सिंचाई ने बताया कि आगामी एक सप्ताह तक जिले में बाढ़ का कोई विशेष जोखिम नहीं है। इसके बावजूद प्रभारी मंत्री ने पूर्व में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर संवेदनशील स्थानों को चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति से निपटने के लिए सभी तैयारियां पहले से पूरी रखी जाएं। 71 बाढ़ चौकियां चिन्हित अधिकारियों ने बताया कि जिले में कुल 71 बाढ़ चौकियां चिन्हित की गई हैं। इनमें सदर में 17, तिलहर में 25, पुवायां में 6, जलालाबाद में 13 और कलान में 10 चौकियां शामिल हैं। आवश्यकता पड़ने पर इन चौकियों को सक्रिय किया जाएगा।
40 हजार लोगों के लिए 60 राहत शरणालय जिले में 60 राहत शरणालय भी चिन्हित किए गए हैं। इनमें सदर में 40, तिलहर में 6, पुवायां में 6, जलालाबाद में 4 और कलान में 4 शरणालय शामिल हैं। इनकी कुल क्षमता करीब 40 हजार लोगों के ठहरने की है। इसके अलावा 11 पशु शिविर भी चिन्हित किए गए हैं, जिनमें करीब 5 हजार पशुओं को रखा जा सकता है। 80 नाव और 15 मोटर बोट की व्यवस्था बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 80 नाव और 15 मोटर बोट चिन्हित की गई हैं। जरूरत पड़ने पर चयनित फर्म के माध्यम से इन्हें उपलब्ध कराया जाएगा। प्रभारी मंत्री ने राहत शरणालयों में आवश्यक व्यवस्थाओं को समय से पूरा कराने और उनका नियमित सत्यापन करने के निर्देश दिए। जलभराव से निपटने के लिए संसाधन तैयार एडीएम एफआर अरविंद कुमार ने बताया कि आपदा मित्रों की नियुक्ति की गई है और एनडीआरएफ की टीम भी कार्यरत है। शहरी क्षेत्रों में संभावित जलभराव से निपटने के लिए ट्रैक्टर, जेसीबी, स्टीमर, लाइफ जैकेट समेत अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था की गई है। प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों से जनता के साथ लगातार संवाद बनाए रखने और उनकी समस्याओं व सुझावों को गंभीरता से लेने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करने के लिए सभी संसाधन तैयार रखे जाएं।

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