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पीलीभीत में मानसून से पहले शहर की जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नाला सफाई का कार्य शुरू कर दिया गया है। लेकिन इस दौरान सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कर्मचारी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के गहरे और जहरीले नालों में उतरकर सफाई करते नजर आ रहे हैं। बुधवार को शहर के दुधिया मंदिर रोड सहित कई इलाकों में सफाई कर्मचारी कमर तक गंदे पानी और सिल्ट में उतरकर नंगे हाथों से प्लास्टिक और कचरा निकालते दिखाई दिए। कर्मचारियों को पीपीई किट, रबर के दस्ताने, गम बूट, मास्क और हेलमेट जैसे जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। नगर पालिका ने शहर के 42 नालों की सफाई के लिए करीब 35 लाख रुपये का टेंडर जारी किया है। टेंडर की शर्तों के अनुसार कार्यदायी संस्था को सफाई कर्मचारियों को सभी आवश्यक सुरक्षा किट उपलब्ध कराना अनिवार्य है। बावजूद इसके नियमों की अनदेखी की जा रही है। मानसून शुरू होने में अब करीब 33 दिन शेष हैं। ऐसे में तेजी से काम पूरा करने के दबाव में कर्मचारियों की सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक नालों की सफाई के दौरान मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं, जिनसे दम घुटने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा बिना सुरक्षा उपकरण काम करने से त्वचा रोग, फंगल इंफेक्शन और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। इस मामले में अधिशासी अधिकारी (ईओ) संजीव कुमार ने कहा कि नाला सफाई का कार्य एक फर्म को दिया गया है। उन्होंने बताया कि बिना सेफ्टी किट के काम कराए जाने की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं थी। ईओ ने कहा कि संबंधित फर्म को तत्काल पत्र जारी कर कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएंगे।
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पीलीभीत में बिना सुरक्षा उपकरण नालों में उतरे सफाई कर्मचारी:मानसून से पहले नाला सफाई योजना शुरू, सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप