पिता की हत्या में बेटे को 10 साल की कैद:सहारनपुर में 10 बीघा जमीन बेचने के विवाद में डंडे से किया था हमला, कोर्ट ने गैर इरादतन हत्या का दोषी माना


सहारनपुर में पिता की हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने बेटे हुकमचंद को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर 25 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला गवाहों के बयान, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सुनाया गया। एडीजीसी विक्रम सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों की गवाही को कोर्ट ने विश्वसनीय माना। एडीजीसी विक्रम सिंह के अनुसार, मामला थाना नानौता क्षेत्र के गांव गुडंब का है। 4 फरवरी 2024 को प्रवीण कुमार ने पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि रात करीब 10:15 बजे उसके पिता रुपचंद और बड़े भाई हुकमचंद के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई थी। विवाद अचानक इतना बढ़ गया कि हुकमचंद ने गुस्से में डंडे से पिता के सिर पर वार कर दिया। गंभीर चोट लगने से रुपचंद की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी वहां से फरार हो गया। उन्होंने बताया कि घटना के समय पड़ोसी सचिन और उसकी पत्नी पायल मौके के पास मौजूद थे। दोनों ने घर में शोर सुनने के बाद छत से देखा कि हुकमचंद अपने पिता के साथ मारपीट कर रहा था। सचिन ने अपनी गवाही में कोर्ट को बताया कि जब वह मौके पर पहुंचा तो रुपचंद जमीन पर पड़े थे और हुकमचंद हाथ में डंडा लेकर अपने घर के कमरे में घुसा। इसके बाद वह वहां से भाग निकला। घटना की जानकारी तत्काल प्रवीण कुमार को फोन पर दी गई। विक्रम सिंह ने बताया कि पुलिस ने प्रवीण कुमार की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल नौ गवाह पेश किए। वादी प्रवीण कुमार ने अपने बयान में बताया कि पिता और बड़े भाई हुकमचंद के बीच पहले से घरेलू विवाद चलता रहता था। परिवार के पास करीब 10 बीघा जमीन थी, जिसे हुकमचंद और उसका छोटा भाई दीपक बेचना चाहते थे, जबकि रुपचंद इसके पक्ष में नहीं थे। घटना वाले दिन भी इसी जमीन को लेकर दोनों के बीच बहस हुई थी, जो बाद में हिंसक रूप ले गई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सहित अन्य दस्तावेजी साक्ष्य भी कोर्ट में प्रस्तुत किए। वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपी को निर्दोष बताते हुए आरोपों से इनकार किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सभी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद कोर्ट ने हुकमचंद को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया। कोर्ट ने उसे 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाने के साथ ही 25 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। एडीजीसी विक्रम सिंह ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान इस मामले में अहम साबित हुए, जिनके आधार पर कोर्ट ने दोष सिद्ध मानते हुए फैसला सुनाया।

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