पहली बार दुर्गाबाड़ी में चैत्र नवरात्रि पर स्थापित होगी मूर्ति:बंगाली रीति-रिवाज से होगा पूजन, गोरखपुर में सिर्फ एक जगह होता था आयोजन


गोरखपुर की दुर्गाबाड़ी में 118 साल बाद पहली बार चैत्र नवरात्रि में मूर्ति की स्थापना होने वाली है। जिसकी तैयारियां चल रही हैं। हालांकि अभी स्थानीय प्रशासन से परमिशन मिलना बाकी है। उसके बाद ही यह निश्चित हो पाएगा कि मूर्ति स्थापित होगी कि नहीं। इससे पहले शहर में सिर्फ एक जगह कैंट थाने के पीछे भारत सेवाश्रम संघ की ओर से ही चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती थी। यहां भी बंगाली रीति रिवाज से ही पूजा होती है, जो इस बार भी होगी। दुर्गाबाड़ी के सेकरेटरी अभिषेक चटर्जी ने बताया कि हर साल हम लोग चैत्र नवरात्रि में दुर्गाबाड़ी में पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं। बस मूर्ति स्थापित नहीं होती थी, लेकिन इस बार समिति ने यह तय किया है कि दुर्गाबाड़ी में शारदीय नवरात्रि की ही तरह वासंतिक नवरात्रि भी मनाई जाएगी। यह निर्णय शहर और आसपास के श्रद्धालुओं की दुर्गा माता के प्रति श्रद्धा और भक्ति को देखते हुए लिया गया है। पिछले कुछ वर्षों से यहां पर चैत्र नवरात्रि में भी शारदीय नवरात्रि की ही तरह भीड़ उमड़ती है। प्रशासन की अनुमति का इंतजार
उन्होंने बताया कि हमने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। एक महीने पहले से ही मूर्ति बनना शुरू हो गई है। बंगाल के मूर्तिकार मूर्ति बना रहे हैं। जो अपनी अंतिम रूप में है। हालांकि जब तक प्रशासन से अनुमति नहीं मिल जाती तब तक यह तय नहीं हो सकता है कि मूर्ति स्थापित होगी या नहीं। फिलहाल हमने इसके लिए प्रशासन को प्रार्थना पत्र भेज दिया है। एक से दो दिन के अंदर जवाब मिल जाएगा। षष्टी के दिन मूर्ति स्थापना होगी
अभिषेक ने बताया कि अगर परमिशन मिल जाती है तो ठीक वैसे ही सब कुछ होगा जैसे शारदीय नवरात्रि में होता है। षष्टी के दिन मूर्ति स्थापना की जाएगी। उसके बाद अलग- अलग दिन बंगाली रीति- रिवाज से पूजा होगी। भारत सेवाश्रम संघ की ओर से 18 वर्षों से होती है पूजा
इसके साथ ही भारत सेवाश्रम संघ की ओर हर साल की तरह इस बार भी चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। अब तक पूरे शहर में सिर्फ इसी जगह चैत्र नवरात्रि में मूर्ति राखी जाती थी। भारत सेवाश्रम संघ एक बंगाली समिति है। हर साल चैत्र नवरात्रि में यहां भव्य आयोजन किया जाता है। इस बार 19वां वार्षिक महोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा। 24 से 28 मार्च तक अलग- अलग कार्यक्रम आयोजित की जाएगी। षष्टी को यहां भी मूर्ति स्थापना की जाएगी। उसके बाद सप्तमी को सुबह से ही कार्यक्रम की शुरुआत हो जाएगी। जिसमें सबसे पहले नवपत्रिका प्रवेश और महासप्तमी की बंगाली रीति रिवाज से विधिवत पूजन किया जाएगा। उसके बाद पुष्पांजलि और शाम को संध्या आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। 27 मार्च को अन्नकूट उत्सव
वहीं महाष्टमी को संधि पूजा और महाआरती की जाएगी। उसके बाद नवमी को इस आयोजन का सबसे आकर्षण का केंद्र अन्नकूट उत्सव मनाया जाएगा। साथ ही कन्या पूजन, हवन और महाप्रसाद वितरण होगा। शाम को संध्या आरती के बाद फिर से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके बाद दशमी के दिन दोपहर से सिंदूर खेला के बाद विसर्जन और भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही चैत्र नवरात्रि का यह वासंतिक उत्सव की समाप्ति होगी। पहली बार होंगे बच्चों के कंपटीशन
आयोजक स्वामी निः श्रेयशानंद ने बताया- वासंतिक नवरात्रि के इस आयोजन में पहली बार कुछ अलग होने जा रहा है। बच्चों के लिए जूनियर (5-10 वर्ष आयु) और सीनियर (11- 16 वर्ष आयु ) वर्ग में प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। अष्टमी के दिन 26 मार्च को शाम 7 बजे से डांस कंपटीशन का आयोजन होगा। जिसमें सिंगल और ग्रुप दोनों की प्रस्तुति होगी। इस कंपटीशन में भक्ति, देश भक्ति, लोकगीत और शास्त्रीय संगीत देखने को मिलेगा। वहीं नवमी यानि 27 मार्च को ड्राइंग कंपटीशन का आयोजन किया जाएगा। जिसमें जूनियर और सीनियर दोनों वर्गों में बच्चें हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे अपने मन पसंद की तस्वीर बना सकते हैं।

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