नौतपा की गर्मी दिल पर पड़ रही भारी:कानपुर कार्डियोलॉजी में 10 दिन में दोगुने हुए मरीज, रोज 50 तक भर्ती


भीषण गर्मी और नौतपा की तपिश अब सीधे लोगों के दिल पर असर डाल रही है। उमसभरी गर्मी के बीच अनियंत्रित बीपी, हीट हेडेक और हृदय रोगों का खतरा तेजी से बढ़ गया है। हालत यह है कि पिछले 10 दिनों में कार्डियोलॉजी अस्पताल में दिल के मरीजों की संख्या दोगुनी हो चुकी है। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 600 से ज्यादा मरीज सीने में जलन, सांस फूलना, घबराहट और तेज धड़कन जैसी शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें से 40 से 50 मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें तुरंत भर्ती करना पड़ रहा है। डॉक्टर बोले- डिहाइड्रेशन से बढ़ रहा दिल पर दबाव
हृदय रोग संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश वर्मा ने बताया कि अत्यधिक गर्मी में शरीर अपना तापमान सामान्य बनाए नहीं रख पाता। गर्मी के कारण रक्त कोशिकाएं फैल जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर लो हो जाता है। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक डिहाइड्रेशन रहने से खून गाढ़ा होने लगता है। ऐसे में दिल को शरीर में रक्त पहुंचाने के लिए ज्यादा दबाव झेलना पड़ता है। पसीने के जरिए शरीर से पानी और जरूरी मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं, जिससे दिल को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और धड़कनें अनियंत्रित हो जाती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, यही कारण है कि इस मौसम में सडन डेथ का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है। हीट हेडेक और कमजोरी के मामले भी बढ़े
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अवधेश शर्मा ने बताया कि इन दिनों हीट हेडेक यानी गर्मी से होने वाले सिरदर्द के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका सीधा असर शरीर में रक्त संचार पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि तेज धूप, गर्म हवाओं और पानी की कमी के कारण लोगों को चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी महसूस होना, उल्टी आना और मांसपेशियों में दर्द व ऐंठन जैसी समस्याएं हो रही हैं। इसके अलावा यूरिन का गाढ़ा होना भी शरीर में पानी की कमी का संकेत है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इन लक्षणों को सामान्य गर्मी समझकर नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। डॉक्टरों ने दी सावधानी बरतने की सलाह
विशेषज्ञों ने लोगों को सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक तेज धूप में बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। साथ ही हल्का, सुपाच्य और कम नमक व कम फैट वाला भोजन करने को कहा है। डॉक्टरों के अनुसार, अगर अचानक घबराहट या अत्यधिक गर्मी महसूस हो तो तुरंत ठंडी जगह पर आराम करें। धूप और उमस में लगातार काम करने से बचें तथा शरीर को पर्याप्त आराम दें। इसके अलावा बीपी, शुगर और मोटापे से पीड़ित मरीजों को दवाएं समय पर लेने और बिना डॉक्टर की सलाह दवा में बदलाव न करने की सलाह दी गई है।

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