नीतीश अपने सांसद की सदस्यता क्यों खत्म करना चाहते हैं:मंत्री चौधरी और हजारी पर चुप्पी, यादव सांसद पर कार्रवाई के पीछे 3 बड़े कारण


बांका के JDU सांसद गिरिधारी यादव की लोकसभा सदस्यता खतरे में है। पार्टी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नोटिस देकर उनकी अयोग्यता की मांग कर दी। हजारी-चौधरी के बेटा-बेटी के दूसरी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने पर चुप्पी साध लेने वाले नीतीश कुमार की पार्टी ने गिरिधारी यादव की कुर्सी पर तलवार लटका दी है। गिरिधारी की सांसदी बचेगी या चली जाएगी। क्या बिहार की राजनीति में एक बार फिर ‘अनुशासन’ का चोला ओढ़कर सत्ता का गणित साधा जा रहा है। इन्हीं सवालों का जवाब आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः JDU अपने सांसद की सदस्यता क्यों खत्म कराना चाहती है? क्या आरोप है? जवाबः जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने अपने बांका सांसद गिरिधारी यादव के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को नोटिस दिया है। पार्टी के संसदीय दल के नेता और सुपौल से सांसद दिलेश्वर कामत ने नोटिस में यादव को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण अयोग्य घोषित करने की मांग की है। गिरिधारी यादव पर 2 बड़े आरोप हैं… पहला- गिरिधारी यादव ने अपने बेटे चाणक्य प्रकाश रंजन को विधानसभा चुनाव में RJD से टिकट दिलवाया। वह बांका की बेलहर सीट से JDU प्रत्याशी मनोज यादव के खिलाफ महागठबंधन के कैंडिडेट थे। सांसद ने पार्टी लाइन से अलग जाकर अपने बेटे के लिए चुनाव प्रचार किया, लेकिन वो हार गए। दूसरा- जुलाई 2025 में यादव ने पार्टी लाइन से अलग जाकर EVM के खिलाफ सार्वजनिक बयान दिया था। जिसे पार्टी ने अपने आधिकारिक रुख के खिलाफ बताया था और कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में कहा गया था, ‘चुनावी साल में इतने संवेदनशील मामले पर आपकी सार्वजनिक टिप्पणियां न केवल पार्टी के लिए शर्मिंदगी का कारण बनती हैं, बल्कि विपक्ष के लगाए गए निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोपों को अनजाने में विश्वसनीयता भी मिलती हैं।’ JDU के एक्शन पर नेताओं के बयान… सवाल-2ः JDU के नोटिस देने से क्या बांका सांसद गिरिधारी यादव की जाएगी सांसदी? जवाबः संभावना बेहद कम है, लेकिन आखिरी फैसला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को करना है। दरअसल, सांसद की सदस्यता पार्टी नोटिस देकर खत्म नहीं करा सकती। सांसद सदस्य की अयोग्यता के लिए संविधान की 10वीं अनुसूची में प्रावधान किया गया है। जिसे दलबदल विरोधी कानून भी कहा जाता है। संविधान की 10वीं अनुसूची की धारा-2 कहती है कि किसी सदस्य की सदस्यता 2 ही स्थितियों में जा सकती है। धारा की व्याख्या में स्पष्ट लिखा है, ‘चुनाव में जिस राजनीतिक पार्टी ने किसी व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया था, वह उसी पार्टी का सदस्य माना जाएगा।’ सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट फैसला है… सवाल-3ः क्या गिरिधारी JDU के पहले नेता हैं, जिनके बेटे ने दूसरे दल से चुनाव लड़ा? जवाबः नहीं। हाल फिलहाल में ऐसे दो नेता और हैं। महेश्वर हजारी और अशोक चौधरी। 2024 लोकसभा चुनाव के समय महेश्वर हजारी और अशोक चौधरी नीतीश सरकार में JDU कोटे से मंत्री थे। हजारी के बेटे सन्नी हजारी कांग्रेस के टिकट पर और चौधरी की बेटी शांभवी चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) के टिकट पर समस्तीपुर से चुनाव मैदान में थी। अशोक चौधरी नीतीश कुमार की 10वीं सरकार में भी मंत्री हैं। और महेश्वर हजारी बतौर विधायक अभी मंत्री रेस में हैं। हजारी-चौधरी पर कार्रवाई क्यों नहीं… सवाल-4ः बांका सांसद पर एक्शन लेकर JDU क्या मैसेज देना चाहती है? जवाबः मौटे तौर पर इसके 3 बड़े मैसेज हैं… 1. पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि: कोई भी नेता (चाहे सांसद ही क्यों न हो) पार्टी लाइन के खिलाफ नहीं जा सकता। विपक्ष को फायदा पहुंचाने वाले बयान या गतिविधियां बर्दाश्त नहीं होंगी। हम किसी भी हालत में इसे बर्दाश्त नहीं कर सकते। 2. NDA में एकजुटता जरूरीः JDU अभी NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) का हिस्सा है और नीतीश कुमार राज्य सरकार की बागडोर छोड़कर दिल्ली जा रहे हैं। उनके बेटे निशांत कुमार को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। ऐसे में गठबंधन में एकजुटता दिखानी जरूरी है। अगर बयानबाजी करने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई तो आगे दिक्कत हो सकती है। गठबंधन में पार्टी अपने ट्रस्ट को बनाए रखना चाहती है। इस कार्रवाई से JDU दिखाना चाहती है कि पार्टी में ‘नीतीश की नजर’ से बाहर जाने पर सख्ती बरती जाएगी। 3. असंतुष्टों को सीधी चेतावनी-हम तेजस्वी-कांग्रेस नहीं हैः विधानसभा चुनाव में कुछ नेताओं के नाराज होने की खबरें आई थी। हाल में JDU ने 11 नेताओं को पार्टी से बाहर निकाला है। अब गिरधारी पर कार्रवाई के लिए नोटिस दे दिया है। इस कार्रवाई के जरिए JDU नेतृत्व अपने असंतुष्ट नेताओं को सीधी चेतावनी दे रहा है कि हमको तेजस्वी यादव और कांग्रेस समझने की भूल मत करें। JDU कमजोर नेतृत्व नहीं, मजबूत लीडरशिप वाली पार्टी है।

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