निषाद-पार्टी ने उपजातियों को SC-सूची में शामिल करने की मांग:जौनपुर में SDM को सौंपा ज्ञापन, जातिगत जनगणना में निषाद वंश की वास्तविक संख्या दर्ज कराने की मांग


जौनपुर में निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एसडीएम सदर को ज्ञापन सौंपा। दोपहर करीब 2 बजे दिए गए ज्ञापन में निषाद वंश की विभिन्न पर्यायवाची उपजातियों को अनुसूचित जाति (SC) की सूची में शामिल करने के साथ आगामी जातिगत जनगणना में उनकी वास्तविक संख्या दर्ज कराने की मांग की गई। जनगणना में ‘मांझवार’ कॉलम में दर्ज करने की मांग पार्टी कार्यकर्ताओं ने मांग की कि निषाद वंश की सभी पर्यायवाची जातियों को आगामी जातिगत जनगणना में ‘मांझवार’ कॉलम में दर्ज किया जाए और इसके साथ विमुक्त जनजाति (DNT) का उल्लेख किया जाए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि इससे निषाद समाज की वास्तविक संख्या का सही आकलन हो सकेगा। ज्ञापन में कहा गया कि अंग्रेजों ने 1871 के क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के तहत निषाद वंश से जुड़े समुदायों को जन्मजात अपराधी घोषित किया था। बाद में भारत सरकार ने इस कानून को समाप्त कर इन समुदायों को विमुक्त जनजाति के रूप में मान्यता दी। इसी के चलते समाज की ओर से 31 अगस्त को विमुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है। अलग-अलग राज्यों में अलग आरक्षण श्रेणी का हवाला निषाद पार्टी ने ज्ञापन में 1931 की जनगणना का हवाला देते हुए कहा कि केवट, मल्लाह, निषाद, बिंद, मांझवार, कश्यप, मछुआरा, माझी और रैकवार आदि को निषाद वंश की पर्यायवाची जातियां माना गया है। पार्टी का कहना है कि वर्तमान में एक ही वंश से जुड़ी इन जातियों को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग आरक्षण श्रेणियों में रखा गया है। उदाहरण के तौर पर दिल्ली में मल्लाह और पश्चिम बंगाल में केवट को एससी श्रेणी में शामिल किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उत्तर प्रदेश में निषाद वंश से जुड़ी जातियां ओबीसी श्रेणी में हैं। इससे समाज में आरक्षण को लेकर विसंगति बनी हुई है। शिक्षा, नौकरी और राजनीति में आरक्षण की मांग निषाद समाज ने उत्तर प्रदेश में निषाद वंश की सभी पर्यायवाची जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने की मांग की है। इसके साथ ज्ञापन में संविधान समीक्षा आयोग के पूर्व अध्यक्ष जस्टिस वेंकटचलैया की सिफारिशों का हवाला देते हुए महाराष्ट्र और पंजाब की तर्ज पर शिक्षा, सरकारी नौकरी और राजनीति में आरक्षण की सुविधा दिए जाने की मांग भी रखी गई। कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार को आगामी जातिगत जनगणना में समाज की वास्तविक स्थिति दर्ज करने के साथ उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

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