नगर निगम को CM की फटकार पर विपक्ष का हमला:कांग्रेस ने कहा-BJP नेता भ्रष्टाचार में शामिल, सपा MLA बोले- अधिकारी किसी की नहीं सुनते


मुख्यमंत्री की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कानपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली, टैक्स व्यवस्था और टेंडर प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देशों के बाद नगर निगम की राजनीति गरमा गई है। सीएम ने लापरवाही, टेंडर में कमियों और काम आवंटित करने की प्रक्रिया की जांच कर रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर निगम के अधिकारियों जांच शरू कर दी है। वहीं, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने मुख्यमंत्री के निर्देश का स्वागत करते हुए इसे काफी देर से उठाया गया कदम बताया है। दोनों नेताओं ने नगर निगम में भ्रष्टाचार, अधिकारियों के कथित गठजोड़ और ठेकेदारों के कॉकस को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। सपा विधायक बोले- ‘बड़ी देर कर दी मेहरबां आते-आते’ सपा विधायक अमिताभ बाजपेयी ने कहा कि मुख्यमंत्री को यह बात काफी पहले कहनी चाहिए थी। उनके मुताबिक, करीब साढ़े नौ साल बाद सरकार को कानपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली में भ्रष्टाचार नजर आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में लंबे समय से अधिकारी मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं और जनप्रतिनिधियों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। विधायक ने कहा कि नगर निगम में अधिकारियों का ऐसा तंत्र बन गया है, जिसके सामने जनप्रतिनिधि भी बेबस नजर आ रहे हैं। बाजपेयी ने कहा कि जेई, एक्सईएन, चीफ इंजीनियर और नगर आयुक्त स्तर तक शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने मेयर के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें अधिकारियों के बात न मानने की बात सामने आई थी। ‘टैक्स पुरानी बात, अब ठेकेदारों का कॉकस’ टैक्स को लेकर सवाल पूछे जाने पर सपा विधायक ने कहा कि टैक्स का मुद्दा अब पुराना हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा समय में नगर निगम में टेंडर और ठेकेदारी का बड़ा खेल चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ ठेकेदारों का कॉकस नगर निगम के बड़े कामों पर प्रभाव रखता है। विधायक ने आरोप लगाया कि दो बड़े अधिकारियों के अपने-अपने पसंदीदा ठेकेदार हैं और अधिकारियों के कार्यकाल में किन ठेकेदारों को बड़े काम मिले, इसकी जांच कराई जाए तो पूरा मामला सामने आ सकता है। विधायक ने एक अधिकारी को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि जिस अधिकारी से पहले किसी आरोप के बाद चार्ज छीना गया था, उसे दोबारा जिम्मेदारी दे दी गई। उन्होंने एक युवा एई को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने पर भी सवाल खड़े किए। ‘एक ही कंप्यूटर से टेंडर अपलोड होने की शिकायत’ अमिताभ बाजपेयी ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी शिकायतें मिली हैं। उन्होंने दावा किया कि एक शिकायतकर्ता ने शपथपत्र के साथ शिकायत की है कि टेंडर एक ही कंप्यूटर से अपलोड किए जाते हैं और उसी दिन खोले भी जाते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को केवल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े मामले तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नगर निगम के सभी बड़े टेंडरों की जांच करानी चाहिए। सपा विधायक ने थर्ड पार्टी जांच की मांग करते हुए कहा कि स्वतंत्र जांच होने पर ही टेंडर और ठेकेदारी से जुड़े पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है। कांग्रेस नेता बोले- नगर निगम में ‘भ्रष्टाचार कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक सुहेल अख्तर अंसारी ने भी नगर निगम में भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जिस भ्रष्टाचार पर सवाल उठाया है, उसे करने वाला कोई बाहर का व्यक्ति नहीं है। उनके मुताबिक, बीजेपी के ही लोग नगर निगम की व्यवस्था में प्रभाव रखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के जनप्रतिनिधियों की संख्या अधिक होने के बावजूद नगर निगम में भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी। कांग्रेस नेता ने कहा कि विपक्षी नेताओं की बात अधिकारी नहीं सुनते, जबकि सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के साथ अधिकारियों की नजदीकी बनी रहती है। अंसारी ने आरोप लगाया कि नगर निगम के अधिकारी ‘बेलगाम’ हो गए हैं और विपक्ष के जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर ध्यान नहीं देते। ‘सीएम की फटकार के बाद अब कार्रवाई जरूरी’ दोनों विपक्षी नेताओं ने माना कि मुख्यमंत्री का नगर निगम की कार्यप्रणाली पर ध्यान देना जरूरी कदम है, लेकिन उनका कहना है कि सिर्फ अधिकारियों को फटकार लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सपा विधायक ने कहा कि टेंडर किसे मिला, किस अधिकारी के कार्यकाल में किस ठेकेदार को बड़े काम मिले और पूरी प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही, इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। वहीं कांग्रेस नेता ने भी अधिकारियों और सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की मांग की। अब मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर होने वाली जांच पर सबकी नजर है। हालाकि बुधवार को अधिकारियों की जांच के बाद पुलिस ने ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले की जांच के लिए पुलिस ने एक्शन लेते हुए एसआईटी का भी गठन कर दिया है।

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