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बांदा में सोमवार को दो अलग-अलग सड़क हादसों में वन विभाग के एक लिपिक समेत दो लोगों की जान चली गई। तिंदवारी इलाके में स्कूटी से दफ्तर जा रहे लिपिक को तेज रफ्तार ट्रेलर ने कुचल दिया। वहीं, बदौसा कस्बे में एक तेज रफ्तार कार ने ई-रिक्शा में टक्कर मार दी, जिससे ई-रिक्शा चालक की इलाज के दौरान मौत हो गई। पहला हादसा तिंदवारी थाना क्षेत्र के टांडा-बांदा राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम मुंगुस में धर्मकांटा के पास सोमवार दोपहर करीब 12:15 बजे हुआ। भगवती नगर के रहने वाले 41 साल के अब्दुल शाहिद वन विभाग के जिला दफ्तर में लिपिक थे। उनके चाचा अब्दुल वसी, जो खुद वन विभाग में गार्ड हैं, ने बताया कि शाहिद सोमवार को इलेक्ट्रिक स्कूटी से दफ्तर जा रहे थे। धर्मकांटा से कुछ कदम पहले फतेहपुर की तरफ से आए एक तेज रफ्तार ट्रेलर ने उनकी स्कूटी को पीछे से टक्कर मार दी। परिजनों की शिकायत पर केस दर्ज टक्कर से शाहिद उछलकर सड़क पर गिरे और ट्रेलर के पिछले पहिए की चपेट में आ गए। सिर कुचल जाने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसा इतना भयानक था कि उनका हेलमेट टूट गया और शरीर के अवशेष सड़क पर बिखर गए।राहगीरों की सूचना पर पुलिस ने कुरसेजा चौकी के पास ट्रेलर और उसके चालक को पकड़ लिया। तिंदवारी थाना प्रभारी संदीप सिंह ने बताया कि चालक को पकड़ा गया है। परिजनों की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया जाएगा। दूसरा हादसा बदौसा थाना क्षेत्र में झांसी-मीरजापुर हाईवे पर पेट्रोल पंप के पास सोमवार सुबह करीब छह बजे हुआ। ग्राम महुराई के रहने वाले 34 साल के अमरजीत पटेल ई-रिक्शा लेकर बदौसा कस्बे की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रही एक तेज रफ्तार कार ने उनके ई-रिक्शा में टक्कर मार दी। टक्कर से ई-रिक्शा पलट गया और अमरजीत बुरी तरह घायल हो गए। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। कार चालक हादसे के बाद गाड़ी छोड़कर भाग गया। पुलिस ने घायल को एंबुलेंस से सीएचसी अतर्रा पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद अनियंत्रित कार विपरीत दिशा में जाकर एक मकान की बाउंड्री से टकरा गई। चालक वाहन को मौके पर छोड़कर फरार हो गया।बदौसा थाना प्रभारी राधाकृष्ण तिवारी ने बताया कि कार चालक का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। स्वजन की तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
चार बच्चों के सिर से उठा पिता का साया अमरजीत पटेल तीन भाइयों में तीसरे नंबर के थे। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं, जो अभी नाबालिग हैं। अमरजीत ई-रिक्शा चलाने के साथ पिता के साथ कृषि कार्य में भी हाथ बंटाते थे। खेती और ई-रिक्शा चलाकर ही परिवार का भरण-पोषण होता था। उनकी मौत से चारों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। हादसे के बाद स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल है।
लिपिक की मौत से परिवार में मचा कोहराम अब्दुल शाहिद की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। उनकी पत्नी फैजाना का रो-रोकर बुरा हाल है। साले मोहम्मद साबिर ने बताया कि शाहिद की शादी छह नवंबर 2008 को हुई थी। हादसे के बाद पुलिस ने दुर्घटना की जांच और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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