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भारतीय गिटारिस्ट, संगीतकार और कंपोजर साक्षम अग्रवाल, जो अपने म्यूजिकल प्रोजेक्ट टीओटीआई (TOTI) के नाम से जाने जाते हैं, ने दुबई में अरबी संगीतकार हसन ताकी इब्राहिम के साथ एक खास अंतर-सांस्कृतिक संगीत सहयोग किया है। इस लाइव सेशन में प्राचीन अरबी वाद्य यंत्र क़ानून और आधुनिक इलेक्ट्रिक गिटार को एक साथ प्रस्तुत किया गया। इस सहयोग की खासियत सिर्फ दो अलग-अलग वाद्यों का साथ आना नहीं, बल्कि दो अलग संगीत परंपराओं के कलाकारों के बीच स्वाभाविक और तात्कालिक संगीत संवाद है। क़ानून मध्य-पूर्व की प्राचीन संगीत परंपरा से जुड़ा तार वाद्य है, जो अपनी सूक्ष्म टोनल बारीकियों, तेज मेलोडिक पैटर्न और माइक्रोटोनल अभिव्यक्ति के लिए जाना जाता है। इसके मुकाबले साक्षम का आधुनिक इलेक्ट्रिक गिटार समकालीन टोन, टेक्सचर और इम्प्रोवाइजेशन की भाषा पेश करता है। प्रस्तुति की सबसे बड़ी बात इसकी स्पॉन्टेनिटी रही। कई संगीतात्मक क्षण पहले से तय नहीं थे, बल्कि दोनों कलाकारों के एक-दूसरे को सुनने, प्रतिक्रिया देने और उसी पल संगीत को आगे बढ़ाने से विकसित हुए। साक्षम ने गिटार को महज क़ानून के साथ बजने वाले दूसरे वाद्य की तरह इस्तेमाल करने के बजाय क़ानून की धुन, लय और टोनल चरित्र को सुनते हुए अपनी गिटार भाषा से जवाब दिया। दोनों वाद्यों के बीच यह संवाद कभी मेलोडिक, कभी लयात्मक और कभी पूरी तरह इम्प्रोवाइज्ड रूप लेता रहा। साक्षम अग्रवाल ने इस अनुभव के बारे में कहा कि मेरे लिए इस सहयोग का उद्देश्य केवल गिटार और क़ानून को एक साथ बजाना नहीं था। दोनों वाद्य यंत्रों की अपनी अलग संगीत भाषा है। क़ानून की मेलोडिक बारीकियों और अरबी संगीत की टोनल संवेदनशीलता को आधुनिक गिटार की हार्मनी और इम्प्रोवाइजेशन के साथ जोड़ना मेरे लिए एक बेहद रोचक संगीत अनुभव था। साक्षम का संगीत आधुनिक गिटार, जैज इम्प्रोवाइजेशन, रॉक-मेटल और सिनेमैटिक कंपोजिशन के अनुभवों का मिश्रण है। वर्तमान में वे टीओटीआई प्रोजेक्ट के साथ-साथ कंपोजिशन, फिल्म स्कोरिंग और अंतरराष्ट्रीय सहयोगों पर काम कर रहे हैं। उनका मकसद आधुनिक संगीत और दुनिया की अलग-अलग संगीत परंपराओं के बीच नए रचनात्मक संवाद स्थापित करना है।
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दुबई में अनोखा संगीत संगम:भारतीय गिटारिस्ट साक्षम अग्रवाल का अरबी कलाकार के साथ लाइव सेशन