दंगे के आरोपी तौकीर रजा की इमारत सील:सीएम योगी की सख्ती के बाद हुई कार्यवाही, मंदिर की जमीन खरीदने का आरोप, हिंदू पक्ष बोले लैंड जिहाद


बरेली के शहर कोतवाली थाना क्षेत्र के मोहल्ला सौदागरान में 26 सितंबर 2025 को हुए दंगों के मुख्य आरोपी मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ प्रशासन ने बड़ा शिकंजा कस दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंगलवार को बरेली आगमन के साथ ही तौकीर रजा और उनके परिवार से जुड़े लोगों की संपत्ति को सील कर दिया गया है। मामला मंदिर की जमीन को अवैध रूप से खरीदने और वहां ‘लैंड जिहाद’ फैलाने का है। इस कार्रवाई के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मचा है। हिंदुओं के मकान के बाद अब मंदिर पर भी नजर
इस पूरे विवाद पर स्थानीय निवासी और मामले में पक्षकार लवलीन कपूर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “दंगाइयों की हिम्मत देखिए, इन्होंने पहले हिंदुओं के मकान खरीदे और अब ये प्राचीन मंदिरों तक को नहीं छोड़ रहे हैं”। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सोची-समझी साजिश के तहत हिंदू बहुल इलाकों की संपत्तियों को टारगेट किया जा रहा है, जो ‘लैंड जिहाद’ का ही एक हिस्सा है। 1978 में रची गई थी साजिश, मंदिर को किया छोटा
मामले की जानकारी देते हुए लवलीन कपूर ने बताया कि मंदिर की करीब 2000 वर्ग गज जमीन को मंदिर के केयर टेकर रहे कुलदीप नारायण शर्मा ने वकील होने का फायदा उठाकर धीरे-धीरे खुर्द-बुर्द कर दिया। उन्होंने खुलासा किया कि 1978 में एक बड़ी साजिश के तहत मंदिर में चोरी की झूठी रिपोर्ट लिखवाई गई। इसके बाद पुरानी दीवारों से भगवान के चिन्ह हटा दिए गए और 2000 वर्ग गज के विशाल मंदिर को महज 6×8 के एक छोटे से कमरे में समेट दिया गया, ताकि उसे ‘पर्सनल’ बताकर बेचा जा सके। रिसीवर की तैनाती और प्रशासन पर दबाव
धर्म प्रकाश रस्तोगी ने बताया कि जब मंदिर की जमीन को मुस्लिम पक्ष के लोगों—तौकीर रजा, मौलाना शहाबुद्दीन और शाजी हाशमी आदि को बेचा गया, तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया। 23 जून को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने संपत्ति सील करने का आदेश दिया था, लेकिन स्थानीय प्रशासन कार्रवाई करने में सुस्त था। आज जब मुख्यमंत्री बरेली आए, तो विधायकों ने यह मामला उनके सामने रखा और सीएम की सख्ती के बाद ही यह प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकी। वर्तमान में कोतवाली पुलिस को रिसीवर नियुक्त कर दिया गया है, ताकि संपत्ति को सुरक्षित रखा जा सके। मंदिर की जगह पूजा हो, व्यापार नहीं
इस मामले पर सुमित मेहरोत्रा ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “जिस तरीके से मंदिर की जगह को खरीदा और बेचा जा रहा है, वह पूरी तरह से गलत है”। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि मंदिर की जगह ना तो खरीदी जानी चाहिए और ना ही बेची जानी चाहिए। सुमित मेहरोत्रा ने आगे कहा, “मंदिर की जगह पर पूजा होनी चाहिए। अगर हम मंदिर की ही जगह पर व्यापार करेंगे, तो यह किसी के भी दिल को आहत करेगा। आज मंदिर बिक रहे हैं, कल मस्जिद बिकने का संदेश जाएगा, यह चीज रुकनी चाहिए”। अब क्या चाहते हैं स्थानीय लोग?
सभी पक्षकारों का अब एक ही सुर में कहना है कि इस जमीन को कब्जे से मुक्त कराना ही काफी नहीं है, बल्कि यहां से अवैध कब्जे हटाकर (बुलडोजर चलाकर) मंदिर के गौरव को बहाल किया जाना चाहिए। प्रशासन ने दुकानों को फिलहाल सील नहीं किया है, लेकिन स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि मंदिर की इस संपूर्ण प्रॉपर्टी को ‘हैंडओवर ट्रस्ट’ के सुपुर्द किया जाए, ताकि वहां भविष्य में एक भव्य मंदिर बन सके।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *