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चित्रकूट प्रशासन में उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के नाम और कथित हस्ताक्षर वाला एक संदिग्ध लेटरपैड सामने आया। इस पत्र में वीवीआईपी दर्शन और ठहरने की सिफारिश की गई थी। प्रथम दृष्टया पत्र फर्जी पाए जाने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, यह पत्र एडीएम कार्यालय के माध्यम से प्रशासन तक पहुंचा। इसमें 7 अगस्त को चित्रकूट धाम में पांच लोगों के लिए वीवीआईपी दर्शन और उच्च स्तरीय आवासीय व्यवस्था उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। पत्र में आलोक कुमार, साधना देवी, शिवांगी, कुसुम लता और सुधा त्रिपाठी के नाम दर्ज थे। पत्र पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का नाम और कथित हस्ताक्षर अंकित थे। साथ ही एक मोबाइल नंबर भी दर्ज था। अधिकारियों को शुरुआत से ही पत्र की सत्यता पर संदेह हुआ। एसडीएम अजय यादव ने बताया कि पत्र में दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को डिप्टी सीएम कार्यालय का पीआरओ बताते हुए पत्र को सही बताया। हालांकि, पत्र की भाषा और प्रारूप पर संदेह होने के बाद सीएमओ डॉ. महेंद्र त्रिपाठी ने स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर इसकी पुष्टि कराई। जांच में स्पष्ट हुआ कि इस प्रकार का कोई पत्र जारी नहीं किया गया था। पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पत्र पर अंकित तारीख और उसके भेजे जाने की तारीख में भी अंतर पाया गया है, जिससे संदेह और गहरा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर कोतवाली पुलिस को विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी लेटरपैड किसने तैयार किया, पत्र में दर्ज मोबाइल नंबर किसका है और इसके पीछे क्या उद्देश्य था। प्रशासन का कहना है कि समय रहते सत्यापन नहीं कराया जाता तो इस फर्जी सिफारिश के आधार पर सरकारी व्यवस्थाओं का दुरुपयोग हो सकता था। जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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डिप्टी सीएम के नाम पर फर्जी लेटर से सिफारिश:चित्रकूट में वीवीआईपी दर्शन प्रशासन तक पहुंचा, पुलिस जांच में जुटी