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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के साथ व्यापार को लेकर कहा कि लंबे समय तक भारत ने अमेरिका पर ऊंचे टैरिफ लगाए और उसका फायदा उठाया। ट्रम्प ने दावा किया कि अब स्थिति बदल गई है और अमेरिका भारत से अच्छी कमाई कर रहा है। ट्रम्प ने आगे कहा कि अमेरिका और भारत के बीच जल्द ही एक बड़ा व्यापार समझौता भी हो सकता है क्योंति मैं मोदी को बहुत पसंद करता हूं। मोदी मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं। हमारे संबंध अच्छे हैं और हम एक-दूसरे को अच्छी तरह समझते हैं। मैं मोदी को बहुत पसंद करता हूं। ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की एक टीम हाल ही में नई दिल्ली में भारत सरकार के अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत कर चुकी है। दोनों देश एक अस्थायी व्यापार समझौते पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि व्यापार से जुड़े कुछ मुद्दों का जल्द समाधान किया जा सके। भारत के वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि बातचीत सकारात्मक रही है और दोनों देश ऐसा समझौता करना चाहते हैं जिससे भारत और अमेरिका, दोनों को फायदा हो। यानी दोनों पक्ष अभी भी व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। अमेरिका अतिरिक्त शुल्क लगाने की तैयारी में समझौतों को लेकर बातचीत के बीच एक नई मुश्किल भी खड़ी हो गई है। अमेरिका ने कुछ देशों पर अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिका का कहना है कि ये देश जबरन मजदूरी से जुड़े मामलों को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं। इस प्रस्तावित सूची में भारत का नाम भी शामिल है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो अमेरिका में जाने वाले भारतीय सामान पर 12.5% अतिरिक्त शुल्क लग सकता है। इससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते हैं और निर्यातकों पर असर पड़ सकता है। भारत सरकार का कहना है कि अभी इस अतिरिक्त शुल्क को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अमेरिका पहले इस प्रस्ताव पर लोगों और संबंधित पक्षों की राय लेगा, उसके बाद ही अंतिम निर्णय करेगा। भारत का यह भी कहना है कि इस मुद्दे के बावजूद दोनों देशों के बीच बड़े व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है और दोनों पक्ष किसी सहमति तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। भारत-US में ट्रेड डील पर फ्रेमवर्क तैयार भारत और अमेरिका ने फरवरी 2026 में इस बात पर सहमति बनाई थी कि दोनों देश एक अंतरिम व्यापार समझौता (इंटरिम ट्रेड डील) करेंगे। इसका मकसद उन व्यापारिक मुद्दों को जल्दी सुलझाना था जिन पर लंबे समय से बातचीत चल रही है। दोनों देश चाहते थे कि व्यापक और बड़े व्यापार समझौते से पहले एक शुरुआती समझौता कर लिया जाए, जिससे व्यापार बढ़ाने और टैरिफ विवाद कम करने का रास्ता खुले। हालांकि बाद में अमेरिका में टैरिफ नीति को लेकर कानूनी विवाद शुरू हो गया। एक अमेरिकी अदालत ने ट्रम्प सरकार के लगाए गए कुछ टैरिफ पर सवाल उठाए और उसे रद्द कर दिया। इसके बाद यह साफ नहीं रहा कि अमेरिका भविष्य में कौन से टैरिफ लागू रख पाएगा और कौन से नहीं। इस कानूनी अनिश्चितता का असर अमेरिका के दूसरे देशों के साथ चल रहे व्यापारिक वार्ताओं पर भी पड़ा। इसी दौरान भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ, बाजार पहुंच, कृषि उत्पादों, ऑटोमोबाइल, ई-कॉमर्स और डिजिटल व्यापार जैसे कई मुद्दों पर बातचीत जारी रही, लेकिन कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। नतीजतन, जिस समयसीमा के भीतर अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जाना था, वह पूरी नहीं हो सकी। अब दोनों देश बातचीत जारी रखे हुए हैं और कोशिश कर रहे हैं कि पहले एक सीमित या अंतरिम समझौता हो जाए। इसके बाद व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर आगे बढ़ा जाए, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को और बढ़ाया जा सके।
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ट्रम्प बोले- भारत ने दशकों तक अमेरिका का फायदा उठाया:अब हम टैरिफ से खूब कमा रहे, फिर भी डील करेंगे क्योंकि मुझे मोदी पसंद