जिला अस्पताल के वार्ड बॉय ने फांसी लगाकर दी जान:अस्पताल के बंद कमरे में मिला शव, सुसाइड नोट में पैसों के लेनदेन का जिक्र


बरेली के जिला अस्पताल में उस समय सनसनी फैल गई जब वहां तैनात एक वार्ड बॉय ने संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस और फील्ड यूनिट ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। पुलिस को तलाशी के दौरान मृतक के पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसके आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। ड्यूटी के दौरान बंद कमरे में उठाया कदम
किला थाना क्षेत्र के कन्हैया टोला निवासी 50 वर्षीय प्रदीप पाठक जिला अस्पताल में वार्ड बॉय के पद पर कार्यरत थे। शुक्रवार को वह अपनी तय समय पर ड्यूटी पर आए थे। बताया जा रहा है कि रात करीब 8 बजे वह एक बंद वार्ड के कमरे में गए और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। काफी देर तक बाहर न आने पर जब साथियों ने खोजबीन की, तो प्रदीप का शव फंदे से लटका मिला। शोर मचने पर अस्पताल के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। साथियों ने बताया ईमानदार और कर्मठ कर्मचारी
अस्पताल में प्रदीप के साथ काम करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि वह बेहद ईमानदार और कर्मठ व्यक्ति थे। उनके एक साथी ने बताया कि प्रदीप वर्ष 2008 से उनके साथ काम कर रहे थे। पहले वे भोजीपुरा में तैनात थे और 2011 से जिला अस्पताल में सेवा दे रहे थे। साथियों के मुताबिक, प्रदीप का व्यवहार हमेशा से बहुत अच्छा रहा और कभी किसी ने नहीं सोचा था कि वह ऐसा आत्मघाती कदम उठा लेंगे। उनके निधन से पूरा अस्पताल स्टाफ सदमे में है। परिवार में कोहराम और पुलिस की कार्रवाई
प्रदीप पाठक अपने पीछे पत्नी और एक विवाहित बेटी को छोड़ गए हैं। अस्पताल में मौत की खबर मिलते ही परिजन बदहवास होकर वहां पहुंचे, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है। इंस्पेक्टर धनंजय पांडे के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह मामला खुदकुशी का ही लग रहा है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फील्ड यूनिट ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए हैं ताकि मौत की असल वजह साफ हो सके। कर्ज और मानसिक तनाव की आशंका
जानकारी के अनुसार, प्रदीप पिछले कुछ समय से आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ के कारण मानसिक तनाव में थे। सुसाइड नोट में भी कर्ज और पैसों के लेनदेन की बात सामने आ रही है। पुलिस अब उन पहलुओं की जांच कर रही है कि आखिर कर्ज का दबाव कितना था और क्या किसी ने उन्हें प्रताड़ित किया था। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सुसाइड नोट की गहन जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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