छात्रों को नहीं लगाने पड़ेंगे यूनिवर्सिटी के चक्कर:कुलपति बोले- DDU में डिजिटलाइजेशन होगा, घर बैठे दूर होगी हर समस्या


दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विद्धविद्यालय में नए कुलपति प्रो. केपी सिंह सबसे पहले डिजिटलाइजेशन पर काम करेंगे। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा जरूरत है यूनिवर्सिटी को डिजिटल मोड में लाने की है। कोशिश यह की जाएगी कि एफीलिएटेड कॉलेज हो या छात्र उनके सभी काम ऑनलाइन ही हो जाए ताकि यूनिवर्सिटी का चक्कर न लगाना पड़ें। इसके अलावा एग्जामिनेशन इवैल्यूएशन सिस्टम में सुधार करना है, रिसर्च, सामाजिक-व्यावसायिक रिलेशंस को बेहतर बनाना है। साथ ही अंतर्राष्ट्रीयकरण पर ध्यान देते हुए ग्लोबल संस्थान की ओर बढ़ाना है। ताकि लोगों को इसके बारें में ज्यादा से ज्यादा पता चल सकें। रिजल्ट और डिग्री में त्रुटियों को कम करने पर होगा काम
उन्होंने रिजल्ट और डिग्रियों में हो रही गलतियों पर कहा कि जबसे NEP लागू हुआ है, सेमेस्टर सिस्टम के तहत परीक्षाएं आयोजित होने लगी हैं। साल में कई बार पेपर होते हैं, जिसकी वजह से नंबर चढ़ाने या इससे जुड़ें अन्य काम भी कम समय के अंदर कई बार करने पड़ते हैं, जिसकी वजह से समस्याएं और गलतियां ज्यादा हो रही हैं। हालांकि धीरे- धीरे इसमें बहुत सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए स्पेशल कैंप लगाकर, स्पेशल विंडो खोल कर या एआई असिस्टेंट के माध्यम से स्टूडेंट्स की हर समस्या दूर करने का प्रयास किया जाएगा। काम जितना ही डिजिटल होगा, उतनी ही आसानी बढ़ती जाएगी। गुआक्टा की मांगों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी
गुआक्टा की समस्याओं पर बोले- पिछले दो दिनों से सेल्फ फाइनेंस और एडेड कॉलेजों के एसोशिएसन, प्रिंसिपल, टीचर्स के परिषद् और मैनेजमेंट से मिला हूं। उनसे हर पहलू पर बातचीत हुई है। समस्याएं तो बनी रहेंगी लेकिन प्रयास यह रहेगा कि जो भी उनकी मूलभूत परेशानी हो उसे नियमानुसार जल्द से जल्द दूर किया जाए। ताकि उनकी कार्यक्षमता में कमी न आए और मनोबल बना रहे। स्टूडेंट्स को योग्य बनाएं शिक्षक
उन्होंने कहा कि शिक्षकों से भी यह अपील रहेगी कि वे अपनी समस्या पर बात करते हुए शिक्षण और प्रशिक्षण को सतत और अच्छा करें। क्योंकि हमारा उद्देश्य है कि हर विद्यार्थी योग्य बनें, अच्छा ह्यूमैन रिसोर्स विकसित करना जिससे, स्टार्टअप और रोजगार बढ़ें। फंड मिलते ही शुरू होगा निर्माणाधीन काम
उन्होंने निर्माणाधीन विकास कार्यों पर कहा कि कैंपस के अंदर के PMUSHA फंड के जरिए काम हो रहा है, जिसमें सरकार की ओर से समय- समय पर फंड मिलता रहा है, उसमें यूनिवर्सिटी ज्यादा कुछ नहीं कर सकती है, केवल अप्रोच कर सकती है। जैसे ही फंड मिलेगा रुका हुआ काम आगे बढ़ता जाएगा। स्टूडेंट्स सीखें एक्सपीरिएशनल लर्निंग
कुलपति ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय स्तर पर यह कोशिश रहेगी कि जो प्रयोगशालाएं सक्षम हो, हमारे स्टार्टअप, एंटरप्रेन्योरशिप और इक्यूवेशन सेंटर चालू रहे और ज्यादा अच्छा काम कर सकें। विश्वविद्यालय समाज के हर हितधारक को जोड़ सकें ताकि हमारा स्टूडेंस्ट एक्सपीरिएशनल लर्निंग (अनुभवात्मक शिक्षा) सीखें। कैम्पस या कॉलेज में आने के बाद विद्यार्थी इतना व्यस्त हो जाए कि उसको घर जाने का मन न करें ऐसी व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जाएगा। पुरानी ट्रेंड को बदलना पड़ेगा
उन्होंने कहा कि जितना मुझे पुराना अनुभव है उस हिसाब से लगता है कि जिस ट्रेंड के साथ यूनिवर्सिटी चलती रही है, उस ट्रेंड के साथ चल नहीं सकती। हमें अपने सोच को पूरी तरह बदलना पड़ेगा। अगर नहीं बदलते हैं उसी में फंसे रह जाते हैं तो बदले हुए सिस्टम में फिट नहीं बैठेंगे। इसलिए पहले से चली आ रही चीजों को बदल कर बोल्ड और असाधारण चीजों की ओर बढ़ना होगा। सबसे जरुरी बात यह है कि हमें अपने एम्बेसडर यानि स्टूडेंट्स को सबसे आगे रखना होगा और दुनिया को बताना पड़ेगा कि यह हमारे तरासे हुए विद्यार्थी हैं।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *