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‘भाई भरत तिवारी को पुलिस ने 5 गोलियां मारी थींं। प्राइवेट पार्ट में भी उन्हें गोली लगी है। बॉडी में गन सटाकर पुलिस ने फायर किया। एक बुलेट तो बॉडी के आरपार हो गई। पुलिस ने भाई के साथ धोखा किया है। पुलिस ने कहा था, हम तुम्हारी हर मांग पूरी कर देंगे, जिसके बाद भाई ने पिस्टल फेंकी थी। पटना में मुझे डॉक्टर ने बताया कि पुलिस भरत को लेकर आई और एक मुर्दे के पास लेटाकर चली गई थी। भरत की किसी तरह की कोई जांच नहीं की गई।’ ये बातें भरत तिवारी की बहन ने कही हैं। वहीं पिता काशीनाथ कहते हैं कि मेरे बेटे का एनकाउंटर हो गया था। इसके बाद भी पुलिस वालों ने मुझे थाने में 12 घंटे तक बैठाकर रखा था। इस कारण मैं बेटे को देख भी न सका। भरत तिवारी के एनकाउंटर पर बहन-पिता ने और क्या कुछ कहा, परिवार की अभी स्थिति कैसी है, ग्रामीणों में किस बात को लेकर गुस्सा हैं, रिपोर्ट में पढ़िए… पहले घटना वाले दिन की तस्वीर… बहन बोली- पीएमसीएच में भाई की डेड बॉडी मिली बहन कहती हैं कि जब एनकाउंटर हुआ था तब मैं बक्सर में थी। मुझे सूचना मिली की भाई को इलाज के लिए ले पटना के पीएमसीएच ले जाया गया है। मैं पीएमसीएच पहुंची। वहां मैंने अपने भाई को सभी जगह खोजा, पर उसका कहीं कुछ पता नहीं चल रहा था। मैंने सोचा कि किसी वार्ड या इमरजेंसी में उसका इलाज चल रहा होगा। एक डॉक्टर से पूछा तो उन्होंने बताया कि एक लाश आई है, एनकाउंटर हुआ है। देख लीजिए वो आपका भाई तो नहीं है। जब मैं लाश के पास पहुंची तो मैंने देखा कि वो मेरे भाई ही था। मेरा छोटा भाई भरत जवनिया गांव के लिए लड़ता था। जब 18 साल का था, तब से ही उसके मन में समाज के लिए कुछ करेंगे या मरेंगे की जिद थी। पिता बोले- पुलिसवालों ने मुझे एनकाउंटर की जानकारी तक नहीं दी थी वहीं पिता काशीनाथ कहते हैं कि एनकाउंटर वाले दिन मैं थाने पर गया था। पुलिस से ये कहने गया था कि बेटा मानसिक रूप से अभी परेशान है। जिसके बाद मुझे पुलिस वालों ने थाने पर ही बैठा लिया। पुलिस वालों ने मुझे शाम सात बजे तक थाने में कैदी की तरह रखा था। दोपहर में कुछ पुलिस वाले आए, उन्होंने कहा कि आपके बेटे को छर्रा लगा है। मामूली चोट है, ठीक हो जाएगा। मुझे नहीं बताया गया कि उसका एनकाउंटर हुआ है। मैं जब घर जाने की बात करता था तो कहते थे बैठिए न थोड़ी देर। शाम में मेरी बहू दौड़ती हुई थाने पहुंची और कहा कि पापा आप यहां बैठे हैं, भरत को इनलोगों ने मार दिया है। जिसके बाद मैं सेंसलेस हो गया था। इसके बाद भी मुझे पुलिस वालों ने घर नहीं जाने दिया। देर शाम मुझसे भरत के बारे में पूछताछ की, वो कैसा लड़का था, क्या करता था। इसके बाद मुझे पुलिस गाड़ी मैं बैठाया और घर छोड़ने की बात कही। हाईवे पर गाड़ी पहुंची थी। जिसके बाद फिर से थाने पर ले जाया गया। फिर से पूछताछ की गई। उसके बाद मुझे घर छोड़ा गया। थाने में मुझे बहुत तकलीफ हुई भरत के पिता ने कहा कि थाने में मुझे बहुत तकलीफ हुई। मैंने तो मुंह भी नहीं धोया था। मैं पुलिस वालों से बोलता रहा कि मेरे बेटे को मार दिया गया है और आप लोग मुझे थाने में बैठाकर रखे हैं। लेकिन पुलिस वालों ने सिर्फ यही कहा कि थोड़े देर बैठिए न। जब मैं थाने में बैठा था तो पुलिस वाले दरवाजा बंद कर दे रहे थे। मैंने उनसे कहा कि मैं कोई अपराधी हूं कि मुझे कैदी जैसे क्यों रखे हैं। बेटे का मर्डर हुआ है। हमारा लड़का चला गया है, अब क्या कर सकते हैं। निर्दोष को जो मार सकता है वो कुछ भी कर सकता है। वीडियो नहीं बनता तो हमारे पास कुछ सबूत ही नहीं होता। हमलोगों को भी प्रशासन ले जाता। 3 गोलियां मौके पर मारी, रास्ते में 2 बुलेट मारी भरत तिवारी के एक दोस्त बताते हैं कि भरत ने तो सरेंडर कर ही दिया था। एक पुलिस वाला उसके पास आया और कंधे पर हाथ रखकर पुलिस गाड़ी की तरफ ले गया। पुलिस ने बहुत करीब से 3 गोलियां मारी। इसके बाद उसे रास्ते में भी 2 गोलियां मारी है। प्रशासन ने मन बना लिया था कि भरत को मारना ही है। ये पूरी तरह से फर्जी एनकाउंटर है। एनकाउंटर के वक्त की तस्वीरें… अब सिलसिलेवार पढ़िए जवनिया गांव के विस्थापितों ने क्या कहा… पहले गांव की तस्वीरें देखिए… जानिए भरत के बारे में ग्रामीणों की राय हमारी परेशानियां दूर होने से पहले ही भरत को मार दिया गया विस्थापित गोरामन चौधरी ने कहा कि यहां 15 मिनट बारिश होती है तो चारों तरफ पानी जम जाता है। ऐसी स्थिति में हमें सांप का डर सताता है। एक अच्छा रोड तक नहीं है। भरत तिवारी हमलोगों की परेशानियों को ठीक कर रहे थे। पर इससे पहले ही उन्हें मार दिया गया। गरीबों के लिए वे आवाज उठाते थे। भरत हमलोगों के लिए लड़ते-लड़ते मरे विस्थापित योगेंद्र चौधरी ने कहा कि प्रशासन कुछ भी बोले, अगर भरत पागल होते तो क्या वे बच्चों के भविष्य के लिए सोचते। पानी-बिजली के लिए सोचते। एक अच्छे आदमी को कोई पागल बोलेगा तो वो हथियार नहीं उठाएगा तो क्या करेगा। प्रशासन कुछ छिपाने की कोशिश कर रहा है, इसलिए उसे पागल कह रहा था। भरत हमेशा हमलोगों से पूछते थे कि कुछ परेशानी है तो बताइए। 2 दिन में हमारी समस्याओं को दूर करते थे। बिजली की परेशानी थी, उसे ठीक कर दिया। दोषी प्रशासन और सरकार है। हमलोगों को इंसाफ चाहिए। क्या कर सकते हैं। हमारे भगवान चलेंगे। जो जनता के लिए आवाज उठाएगा, उसको सरकार पागल ही बोलेगी मुन्ना प्रसाद चंद्रवंशी ने कहा कि भरत तिवारी जैसे आदमी हो ही नहीं सकता। जो जनता के लिए मांग उठाए। उसको सरकार पागल बोलेगी ही। यहां दो सरकारी चापाकल था। उससे पानी पीने लायक नहीं आता था। इसके लिए आवाज उठाना गलत है क्या। भरत भगत सिंह जैसे थे। हमेशा भरत बोलते थे कि कोई दिक्कत हो तो बताइएगा। उन्हें 3 गोलियां मारी गई थी। उनके साथ गलत हुआ है। हमलोग उनके परिवार के साथ हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे थे भरत संजय गांधी कॉलेज के अध्यक्ष हरे कृष्ण उपाध्याय ने कहा कि कोई अगर सरकार को चेतावनी देता है तो उसको गोली का शिकार होना पड़ता है। प्रशासन निरंकुश है, उसपर किसी का दबाव नहीं है। भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद को क्यों फांसी दी गई, इसलिए कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे। भरत भी ऐसा ही कर रहा था। सरकार अभी से चेत जाए नहीं तो भरत भूषण जैसे करोड़ों लोग हथियार लेकर निकलेगा। हथियार डालने के बाद भी एनकाउंटर होता है, ऐसा थोड़े न होता है। हमलोगों में गुस्सा है, पर संयमित है। ऐसा काम नहीं करेंगे जो कानून के खिलाफ हो। एनकाउंटर से पहले प्रशासन ने हमें भगा दिया था मंटू ने कहा कि माहौल अभी गर्म है। भरत के साथ बहुत गलत हुआ है। जो आवाज उठाएगा वो इसी तरह से खत्म हो जाएगा। भरत हमलोगों के लिए वे एक आवाज थे। एनकाउंटर वाले दिन प्रशासन ने हमलोगों को वहां से हटा दिया। पुलिस बोल रही थी, हट जाओ नहीं तो गोली लग जाएगी। इसके बाद हमलोगों ने सारी कहानी भरत के लाइव से ही देखी। एक पिस्टल के मैगजीन में 15 गोली आती है क्या, तो 15 राउंड फायरिंग कैसे होगी। उसमें भी एक कारतूस मिला था। जिम्मेदार प्रशासन है। हमलोगों को न्याया चाहिए। एनकाउंटर के बाद से अभी तक कोई अधिकारी नहीं आए हैं। संजू देवी ने कहा कि डर लगता है। एक अच्छे इंसान को मार दिया गया। वे पागल होते तो सामाजिक बातें करते। भरत को न्याय मिलना चाहिए। पिता के पेंशन पर चल रहा परिवार भरत के पिता बिहार पुलिस में हवलदार थे। जो 10 साल पहले रिटायर्ड हुए थे। भरत तिवारी कारोबार की प्लानिंग कर रहा था। घर के आगे ई-बाइक का शोरूम खोलने वाला था, पर सपना अधूरा रह गया। घर का इकलौता कमाऊ सदस्य था। इसके जाने के बाद आर्थिक स्थिति गड़बड़ा गई है। पिता के पेंशन से अभी घर चल रहा है। समस्याओं को लगातार उठा रहे थे भरत भोजपुर के जवनिया गांव में पिछले साल बाढ़ में कई लोगों के घर गंगा में बह गए थे। जिसके बाद उनके पास रहने के लिए जगह नहीं थी। सरकार ने 70 परिवार को बिलौटी के टार इलाके में रहने के लिए जमीन दी। हर परिवार को 3 डिसमिल जमीन और 40 हजार रुपए दिए गए थे। पर जहां जमीन है, वहां सुविधाएं नहीं है। 70 परिवार फूंस का घर बनाकर रह रहा है। जहां परिवार रह रहा, वहां बहुत बड़ा गड्ढा है। बारिश के बाद घुटने भर पानी लग जाता है। वहां मिट्टी भरी नहीं गई। पक्की सड़क नहीं है, स्कूल नहीं है। सरकार ने दो चापाकल लगवाए है, पर उससे पीने लायक पानी नहीं आता है। इन्हीं सब समस्याओं को लेकर भरत तिवारी सिस्टम से लड़ रहे थे।
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'गोली लगने के बाद भरत को मुर्दों के बीच रखा':बहन बोली-भाई के प्राइवेट पार्ट में भी लगी थी गोली, एनकाउंटर पर पिता का दर्द