क्यूबा के राष्ट्रपति के अनसुने किस्से:अमेरिका को चुनौती देने वाले डियाज ने कभी लंबे बालों के लिए बगावत की थी


रूढ़िवादी कम्युनिस्ट विचारधारा के सबसे मजबूत गढ़ क्यूबा में बदलाव की बयार लाना कभी आसान नहीं रहा। लेकिन इस देश की कमान एक ऐसे शख्स के हाथ में है, जिसने अपनी पूरी जिंदगी ही लीक से हटकर जीने में गुजार दी। यहां बात हो रही है क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कानेल की। युवावस्था में व्यवस्था की कमियों के खिलाफ लड़ने वाले डियाज-कानेल फिर सुर्खियों में हैं। उन्होंने अमेरिका को चेताते हुए कहा है कि यदि क्यूबा के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई की गई, तो ‘खून-खराबा’ हो जाएगा। उनका व्यक्तित्व विरोधाभासों से भरा रहा है। कट्टरपंथियों का विरोध झेला, अमेरिका से बात शुरू की छात्र जीवन में मिगुएल ने स्कूल के कड़े कम्युनिस्ट अनुशासन के खिलाफ सिर्फ इसलिए बगावत कर दी थी, क्योंकि उन्हें लंबे बाल रखने का शौक था। आगे चलकर उन्होंने पार्टी के भीतर बैठे कट्टरपंथियों के भारी विरोध की परवाह न करते हुए अमेरिका के साथ सालों से बंद पड़े कूटनीतिक रिश्तों को दोबारा शुरू करवाया। कभी जनता के दर्द पर आंसू बहाने वाले डियाज-कानेल पर 2020 और 2021 के जन-आंदोलनों को कुचलने का आरोप है। तब 1400 गिरफ्तारियां हुईं। महिलाओं, बच्चों समेत 700 लोगों को 10-25 साल तक की कैद की सजा दी गई। मंदी के दौर में साइकिल से दफ्तर जाते थे 1990 के दशक में क्यूबा आर्थिक मंदी से जूझ रहा था, तब प्रांतीय पार्टी सचिव रहते हुए मिगुएल ने सरकारी गाड़ी छोड़ दी थी। वह रोजाना साइकिल से दफ्तर जाते थे। बिजली संकट गहराया, तो वह रात के अंधेरे में अस्पतालों का दौरा करते थे और टॉर्च की रोशनी में बेड पर लेटे मरीजों से अव्यवस्था के लिए हाथ जोड़कर माफी मांगते थे। कम्युनिस्ट नेताओं का जनता से मिलना या अपनी गलती मानना दुर्लभ माना जाता था। लाइव टेलीकास्ट क्यूबा में दशकों तक फिदेल कास्त्रो और राउल कास्त्रो का शासन रहा, जो घंटों लंबे और उबाऊ भाषणों के लिए जाने जाते थे। लेकिन डियाज-कानेल ने अप्रैल 2018 में राष्ट्रपति के रूप में सत्ता संभालते ही इसे बदल दिया। वह चंद मिनटों की ‘टू-द-पॉइंट’ बात करने के लिए मशहूर हैं। कैबिनेट की बैठकों का सीधा प्रसारण (लाइव टेलीकास्ट) शुरू किया, ताकि आम नागरिक देख सकें कि देश के लिए क्या फैसले लिए जा रहे हैं और कौन सा अधिकारी क्या जवाब दे रहा है। इसके अलावा, उन्होंने कम्युनिस्ट परंपराओं को तोड़ते हुए पहली बार अपनी प|ी लिस कुएस्ता को आधिकारिक तौर पर ‘फर्स्ट लेडी’ का दर्जा भी दिया।

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