कोर्ट ने विवेचना अधिकारी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट रद्द किया:SSP आजमगढ़ को हाईकोर्ट ने पेश होने को कहा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजमगढ़ के महाराजगंज थाने में दर्ज एक मामले में विवेचक विनय कुमार मिश्रा के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट वापस ले लिया है। साथ ही अदालत ने एसएसपी आजमगढ़ और महाराजगंज के थानाध्यक्ष को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आद

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न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने यह आदेश सचिन यादव की जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है। दर्ज एफआईआर के मुताबिक पीड़िता की शादी आवेदक से तय हुई थी, लेकिन किसी गलतफहमी के कारण नहीं हो सकी। आरोप है कि इसके बाद आवेदक ने वीडियो कॉल कर पीड़िता का अश्लील वीडियो बनाया, ब्लैकमेल किया और इन्कार करने पर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

सुनवाई में क्या दलीलें जानिये

3 सितंबर को सुनवाई में आवेदक के वकील ने दलील दी कि उसके मोबाइल से कोई अश्लील वीडियो बरामद नहीं हुआ और राज्य के जवाबी हलफनामे के साथ लगे स्क्रीनशॉट में सामग्री “राकेश” नाम के व्यक्ति ने भेजी थी, जिससे आवेदक का कोई संबंध नहीं है। कोर्ट ने पाया कि जवाबी हलफनामे में यह नहीं बताया गया कि राकेश कौन है और वीडियो किसने अपलोड किया। अपर शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि आवेदक का मोबाइल एफएसएल भेजा गया है, पर रिपोर्ट नहीं आई और केस डायरी में आईपी एड्रेस जैसा कोई विवरण नहीं है। इस पर कोर्ट ने विवेचक को रिकॉर्ड के साथ पेश होकर जांच में कमी का कारण बताने का निर्देश दिया था।

गैर-जमानती वारंट जारी किया था

16 सितंबर को विवेचक हाजिर नहीं हुए और उनकी जगह उप-निरीक्षक अशोक कुमार सिंह को भेजा गया। बिना किसी छूट की अर्जी या सूचना के गैरहाजिरी को कोर्ट ने अवमाननापूर्ण मानते हुए विवेचक के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।

फिर नया आदेश जारी हुआ

29 सितंबर को पेश हुए विवेचक विनय कुमार मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि उन्हें 20 जुलाई 2026 को यूपीपीसीएल की विजिलेंस विंग में स्थानांतरित किया जा चुका था और एसएसपी कार्यालय या थानाध्यक्ष की ओर से उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। उनमें उनकी कोई गलती नहीं थी। कोर्ट ने स्पष्टीकरण से संतुष्ट होकर वारंट रद्द कर दिया और उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति से अगले आदेश तक छूट दे दी।

विवेचना अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि जांच में पता चला है कि “राकेश यादव” के नाम से बनी फेसबुक आईडी खुद आवेदक सचिन ने बनाई थी, और इसके लिए इस्तेमाल सिम कार्ड भी सचिन के ही नाम पर जारी था। कोर्ट ने अपर शासकीय अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे उस पेन ड्राइव को अगली तारीख पर पेश करें, जिसमें कथित तौर पर इसी फर्जी आईडी से अपलोड किया गया पीड़िता का वीडियो है।

एसएसपी और थानेदार की लापरवाही मानी

कोर्ट ने एसएसपी आजमगढ़ और थानाध्यक्ष महाराजगंज की लापरवाही मानते हुए दोनों को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का निर्देश दिया। अपर शासकीय अधिवक्ता अनुराग पांडेय ने कोर्ट को यह भी बताया कि एसएसपी के पीआरओ ने फोन पर उनसे दुर्व्यवहार किया और उन्हें “अनपढ़” कहा। इस पर कोर्ट ने पीआरओ को भी अगली तारीख पर बुलाया है।

मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी। आदेश की प्रति रजिस्ट्रार (अनुपालन) के माध्यम से एसएसपी आजमगढ़, थानाध्यक्ष महाराजगंज और एसएसपी के पीआरओ को भेजी जाएगी।

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