कोडीन-कफ-सिरप के बाद प्रथम फार्मा का स्कैम:वाराणसी में 35 से अधिक कारोबारियों से ली दवाएं, दिसंबर 2025 से नहीं किया पेमेंट


‘हम सभी लोग लोन लेकर कारोबार करते हैं। सभी का बैंक का सीसी है। उससे ही धंधा होता है। लेकिन प्रथम फार्मा ने सितंबर 2025 के बाद लेनदेन नहीं किया। और 16 दिसंबर से फोन भी बंद कर लिया। मेरा 29 लाख रुपए उसके ऊपर बकाया है। हम जब कहते तो कहता दे देंगे अंकल बस दो दिन और, लेकिन आज तक पैसे नहीं मिले। बीच में चेक दिया पर वह भी फर्जी निकला। ऐसे सिर्फ मै नहीं और भी 30 से 35 दुकानदार हैं जिनका बकाया है। पैसा नहीं मिला तो हमारी दुकानों में ताला लग जाएगा।’ ये कहना वाराणसी के सप्तसागर दवा मंडी में कारोबार करने वाले राजू सेठ का। राजू सेठ की फार्मा उनकी बहू के नाम से है। राजू ने बताया- मेरी उम्र 60 साल के करीब है। प्रथम फार्मा ने हमारा पैसा रोका तो हमने पुलिस से सहयोग मांगा। उसने पुलिस के सामने स्टाम्प पर लिख के दिया था की एक फरवरी से पैसा मिलना सबको शुरू होगा पर आज तक पैसा नहीं मिला तो हमने एफआईआर कराई है। वाराणसी की सप्तसागर दवा मंडी कोडीन कफ सिरप मामले से चर्चा में आने के बाद अब प्रथम फार्मा का स्कैम से चर्चा में आ गयी है। यह धोखाधड़ी सप्तसागर मंडी की अभी तक की सबसे बड़ी धोखाधड़ी बन गयी है। प्रथम फार्मा के द्वारा पैसा रोके जाने के मामले में कोतवाली थाने में दो एफआईआर भी दर्ज हुई। इसमें एक में 10 व्यापारी हैं। जिनका 60 लाख रुपया है। वहीं एक अलग एफआईआर राजू सेठ की है। जिसमें अकेले 29 लाख की धोखाधड़ी का मामला है। ऐसे में दैनिक भास्कर ने सप्तसागर दवा मंडी में इस धोखाधड़ी में परेशान व्यापारियों से बात की। और जाना की यह स्कैम कैसे हुआ ? और कितने लोगों का कितना पैसा इसमें फंसा है और पुलिस किस तरह से मदद कर रही है। पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले जानिए कितने व्यापारियों का रुका है ?भुगतान और कब खुली थी ये प्रथम फार्मा ?… वाराणसी के बड़ागणेश मंदिर के पास प्रथम फार्मा नाम से एक मेडिकल स्टोर जुलाई 2023 में मनीष मद्धेशिया ने अपनी पत्नी के मोना मद्धेशिया को प्रोप्राइटर बनाकर अपने बेटे प्रथम के नाम से खोला था। सप्तसागर दवा मंडी विक्रेता समिति के महामंत्री संजय सिंह के अनुसार मनीष वर्षों तक एक दुकान पर कार्य करता था। सभी व्यापारियों से काफी घुला मिला हुआ था। लेकिन वह इतना बड़ा स्कैम करेगा किसी को पता नहीं था। 35 लोगों ने दी थी सूचना संजय सिंह ने कहा – 11 लोगों ने FIR दर्ज कराई है लेकिन मेरे पास 34 लोग आये हैं और जिन्होंने बताया कि उनका पैसा मनीष ने रोक दिया है। इसमें सिर्फ लाखों का नहीं करीब 5 करोड़ की धोखाधड़ी की थी। पुलिस से हमारे संगठन ने सहायता मांगी थी। जिसके बाद पुलिस हमारी मदद कर रही है। जल्द ही व्यापारियों का पैसा वापस दिलाया जाएगा। पहला ऐसा केस संजय ने बताया – यह सप्तसागर दवा मंडी की पहली घटना है। ऐसा पूर्व में कभी नहीं हुआ था। इसने साल 2023 में लाइसेंस लेकर दुकान खोली। इसके बाद बड़े बड़े दुकानदारों से सामान मंगवाया। दवाएं ली और फिर उसका पैसा भी दिया। लेकिन जब विश्वास हो गया तो उसने दवाओं की क्वांटिटी बढ़ा दी। लोग भी उसे सामान देते रहे वह लगातार माल ज्यादा मंगाने लगा और चेक देने लगा। अचानक से उसने दिसंबर में दुकान बंद कर दी और फरार हो गया। वाराणसी से 3.5 करोड़ और एमपी, दिल्ली और आगरा में भी फ्राड संजय सिंह ने बताया – हम लोगों को जो सूचना मिली है कि प्रथम फार्मा के नाम मनीष ने करीब 3.5 करोड़ का गबन किया है। इसके अलावा सूचना मिली है कि दिल्ली और आगरा के अलावा एमपी के ग्वालियर के भी कई फार्मों से माल मंगाया और उन्हें भी पैसा नहीं दिया। जिससे 5 करोड़ के गबन का यह मामला है। जानिए व्यापारियों से कैसे लिया माल? और उन्हें कैसे-कैसे दिए आश्वासन ?… सितंबर 2025 से शुरू हुई हीला-हवाली अग्रवाल एन्ड अग्रवाल मेडिकल एजेंसी के प्रोप्राइटर सौरभ अग्रवाल ने कोतवाली थाने में 10 व्यापारियों की तरफ से 17 अप्रैल को तहरीर दी थी। जिसके बाद पुलिस ने धारा 316(5), 338, 336(3), 340(2) में मुकदमा दर्ज कर लिया है। सौरभ ने दैनिक भास्कर को बताया – प्रथम फार्मा से हम एक साल से व्यापार कर रहे थे। मेरा 22 लाख 55 हजार रुपए बकाया है। ये लगातार माल लेते थे और समय पर पैसा लेते थे। सितंबर 2025 से ये हिला हवाली करने लगे। NEFT की बात कर रहे थे। साथ ही हमें चार चेक भी दिए थे जो बाऊंस हो गए। हमेशा सिर्फ किया वादा नहीं दिया पैसा सौरभ ने बताया – हमने जब दबाव बनाया तो मनीष मद्धेशिया हर हफ्ते हमें एक बार फोन करते कहते आइये लोहटिया आप को दो लाख रुपए दे रहे हैं। फिर कहते घर आ रहा एक लाख रुपए दे रहा या ऑनलाइन डाल दूं। पर आज तक कोई भुगता नहीं किया इन्होने। बस आश्वासन देते रहे। ऐसे में हम लोगों ने पुलिस का सहारा लिया और एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस से की थी शिकायत, नहीं हुआ कुछ भी सौरभ ने बताया – इस मामले में पुलिस ने हमारी मदद की थी। और 24 जनवरी 2025 को सप्तसागर चौकी इंचार्ज प्रीति जी ने थाने में बैठकर मनीष मद्धेशिया और उसके दो साले जो गवाह के रूप में मौजूद थे। ने 100 रुपए के लिखित स्टाम्प पर समझौता किया था की एक फरवरी से सभी को पैसा देने लगेंगे। और 6 महीने में सबका बकाया पूरा कर देंगे। पर किसी को आज तक एक पैसा नहीं दिया। इससे यह पता चल रहा है कि यह सुनियोजित साजिश है। सुनियोजित तरीके से किया गया यह काम नारायण इंटरप्राइजेज के मालिक देवानंद कुकरेजा ने बताया – प्रथम फार्मा जून 2023 में खुली है। उसके पहले मनीष यहीं एक दुकान में काम करता था। वो पुराना था तो हम लोग उसे पहचानते थे। ऐसे में हम लोगों ने उसे माल देने शुरू कर दिया। पहले तो यह एक सप्ताह, 15 दिन में वह भुगतान करता था। लेकिन सितंबर 2025 में इसने भुगतान बंद कर दिया है और पैसा देने में हीलाहवाली करने लगा। हमारा कुल 7 लाख 16 हजार रुपया बाकी है। पैसा देकर लिया भरोसे में सप्तसागर दवा मंडी में आकर्ष फार्मा के नाम से कारोबार करने वाले प्रदीप कुमार जायसवाल ने बताया – हमारी सिफ 12 से 15 डीलिंग हुई थी।जिसमें उसने शुरुआत में अच्छा पेमेंट किया और समय पर पैसा दिया। सितंबर 2025 के बाद से मनीष ने पैसा रोक दिया। ये टाल-मटोल करने लगा। हमने दबाव बनाया तो एक चेक दिया जो बाउंस हो गया। पिछले एक महीने से यह शॉप बंद भी हो गई। यह प्री प्लानिंग करके इसने दो साल के लिए फार्म खोली थी और जानकारी जो मिली है इसने अपना जीएसटी भी कैंसिल करवा दिया है। हमारा चार लाख 74 हजार रुपया बकाया है। हम कुछ नहीं चाहते बस हमें पेमेंट चाहिए। लाख रुपए का माल जाता था तो पैसा मिलता था विष्णु एजेंसी के प्रोप्राइटर विष्णु कुमार गुप्ता ने बताया – मेरे पास फाइजर की एजेंसी है। मनीष मुझसे 8 महीने से लेनदेन कर रहा था। शुरुआत में उसने लाख-50 हजार रुपए का माल मंगाया था। उसके बाद उसने जुलाई 2025 में बड़े अमाउंट का माल मंगाया। वह छोटा अमाउंट समय पर दे रहा था। ऐसे में हमने उसे वह माल भी दे दिया पर उसने सितंबर से पैसा ही नहीं दिया। लेकिन माल मंगाया। ऐसे में कुल 8 लाख 39 हजार का बकाया हो गया। हमने जब उससे पैसा मांगा तो वह बाउंस हो गया। ऐसे में हम लोगों ने एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर शुरू की जांच इस पूरे प्रकरण में एसीपी विजय प्रताप सिंह ने बताया – एफआईआर दर्ज कर पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। हमारी प्राथमिकता व्यापारियों का बकाया पैसा दिलवाना है। पूर्व में समझता कराया गया था। सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। ————————-
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