कानपुर में सर्राफ के घर हुई चोरी का खुलासा:23 साल से रहने वाले किराएदार का बेटा ही निकला चोर, सोना खरीदने वाला टीचर भी अरेस्ट


कानपुर की गोविंद नगर पुलिस ने दबौली के सर्राफ के घर 15 लाख के जेवरात चोरी के मामले का रविवार को खुलासा कर दिया। 23 सालों से उनके घर में ही रहने वाले किराएदार का बेटा ही चोर निकला। चोरी के बाद से किराएदार का बेटा गायब था, इसी आधार पर सर्राफ के परिवार को शक हुआ और पुलिस ने उसे दबोचा तो चोरी का खुलासा हो गया। पुलिस ने चोर के साथ ही चोरी के जेवरात खरीदने वाले सर्राफ को भी अरेस्ट कर लिया। दोनों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। घर छोड़ने के चलते ही मकान मालकिन को हुआ किराएदार के बेटे पर शक डीसीपी साउथ दीपेन्द्र नाथ चौधरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चोरी का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि दबौली निवासी दुर्गेश श्रीवास्तव दिल्ली में ज्वैलरी का कारोबार करते हैं। 20 अप्रैल को उनकी पत्नी प्रभा देवी घर पर ताला लगाकर उनके पास गईं थीं। 27 मई को घर लौटी तो दंग रह गईं, घर के मेन गेट पर दूसरा ताला लगा हुआ था। ताला तुड़वाकर भीतर दाखिल हुईं तो होश उड़ गए। घर के भीतर कमरे में सारा सामान अस्त व्यस्त मिला। अलमारी खुली मिली, जिसमें रखे करीब 15 लाख के गहने गायब थे। इस पर करीबी का हाथ होने पर उन्होंने किराएदार सुनीता और उसके दोनों बेटे प्रशांत व कल्लू पर आशंका जताते हुए गोविंद नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। चोरी के बाद से किराएदार का बेटा प्रशांत घर से गायब था। संदेह के आधार पर प्रशांत गौतम को पकड़कर पूछताछ की गई तो उसने जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि कर्ज चुकाने के लिए उसने ही चोरी करके ताले बदल दिए थे। इसके बाद पूरे जेवरात बेचकर कर्ज अदा कर दिया था। कर्ज के तनाव के चलते ही उसने वारदात को अंजाम दिया था, डर की वजह से घर छोड़कर भाग निकला था। चोरी का सोना खरीदने वाला भी गया जेल पूछताछ के दौरान प्रशांत ने बताया कि गहने चोरी कर कोचिंग में जीव विज्ञान पढ़ाने वाले महादेवनगर निवासी शिक्षक विशाल की ज्वैलरी शाप पर बेचे हैं। बदले में मिले 1.96 लाख रुपये से उसने रुपये का कर्जा चुकाया और मोबाइल खरीदा था। डीसीपी ने बताया कि काफी समय पर किराए में रहने के कारण परिवार वालों में घनिष्ठता था। पीड़ित की बेटी आरोपित को भाई मानकर राखी भी बांधती थी, जिसका फायदा उठाकर प्रशांत दो बार पहले भी गहने चोरी कर चुका था, लेकिन पारिवारिक संबंध होने के चलते संदेह नहीं किया था।

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