कानपुर में बच्चों पर 'ड्राई हीट' का बड़ा खतरा:डॉ. शैलेंद्र बोले-शरीर तपे, पसीना न आए तो फौरन अस्पताल जाएं; अंगों को हो सकता है नुकसान


शहर में भीषण गर्मी के बीच मासूम बच्चों की सेहत को लेकर एक बड़ा अलर्ट सामने आया है। अब साधारण लू के साथ-साथ ‘ड्राई हीट’ बच्चों के लिए नया और जानलेवा खतरा बन रही है। बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र कुमार गौतम ने चेतावनी दी है कि यदि बच्चे का शरीर आग की तरह तप रहा है और उसे पसीना नहीं आ रहा, तो यह उसके शरीर के ‘कूलिंग सिस्टम’ के फेल होने का संकेत है। ऐसी स्थिति में बच्चे के अंगों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है या वह बेहोश हो सकता है, इसलिए इसे मामूली बुखार समझने की गलती न करें। पसीना न आना है शरीर के सिस्टम फेल होने का इशारा अक्सर माता-पिता को लगता है,कि यदि बच्चे को पसीना आ रहा है, तो वह गर्मी झेल पा रहा है। लेकिन ड्राई हीट के मामले में शरीर इतना गर्म हो जाता है कि दिमाग का वह हिस्सा, जो तापमान को कंट्रोल करता है, काम करना बंद कर देता है। इसका सीधा असर यह होता है कि शरीर झुलसने लगता है लेकिन पसीना आना पूरी तरह बंद हो जाता है। डॉ. गौतम के मुताबिक, पसीना न आना इस बात का साफ संकेत है कि बच्चे का शरीर अब अंदरूनी गर्मी को बाहर निकालने में पूरी तरह अक्षम हो चुका है। बेहोशी और झटकों का खतरा, स्थाई नुकसान की आशंका बाल रोग विभाग के विभागध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि,ड्राई हीट की चपेट में आने पर बच्चे को सिर्फ तेज बुखार ही नहीं होता, बल्कि उसे चक्कर आने लगते हैं और आँखों के सामने धुंधलापन छा सकता है। गंभीर मामलों में बच्चा बेहोश हो सकता है या उसे झटके (सीज़र) भी आ सकते हैं। ऐसी हालत में की गई जरा सी भी देरी बच्चे के नाजुक अंगों को स्थाई रूप से नुकसान पहुंचा सकती है। सरकारी अस्पतालों में बच्चों के लिए खास AC वार्ड सक्रिय
भीषण गर्मी और ड्राई हीट से निपटने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में व्यापक इंतजाम किए हैं। हर बड़े अस्पताल में विशेष ‘हीट वेव वार्ड’ बनाए गए हैं, जो पूरी तरह से वातानुकूलित (AC) हैं। यहां इलाज की सभी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। मैटरनिटी विंग में जहां 20 बेड आरक्षित किए गए हैं, वहीं पीडियाट्रिक विभाग के वार्ड नंबर 8 में बच्चों के लिए विशेष रूप से 6 बेड सुरक्षित रखे गए हैं, जहां डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे तैनात है।

डॉक्टर ने बताया बचाव का तरीका,धूप से तौबा और भरपूर पानी
डॉ. शैलेंद्र कुमार गौतम ने माता-पिता को सलाह दी है,कि छोटे बच्चों को दोपहर 12 से शाम 4 बजे के बीच घर से बाहर बिल्कुल न निकालें। यदि बाहर जाना बहुत आवश्यक हो, तो बच्चे के हाथ, पैर और मुंह को सूती कपड़े से अच्छी तरह ढक कर रखें। बच्चा प्यासा न भी हो, तब भी उसे थोड़ी-थोड़ी देर में पानी, ओआरएस या घर के बने तरल पदार्थ पिलाते रहें ताकि शरीर में नमी बनी रहे। यदि बच्चे में अत्यधिक सुस्ती या पसीना न आने जैसे लक्षण दिखें, तो बिना समय गंवाए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सरकारी अस्पताल ले जाएं।

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