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शहर में लगातार बढ़ रहे ध्वनि प्रदूषण को लेकर यातायात पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। नॉइस पॉल्यूशन को नियंत्रित करने के लिए शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों को चिन्हित कर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। यातायात पुलिस का कहना है कि लगातार बढ़ता शोर पर्यावरण के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रहा है। DCP रविंद्र कुमार के मुताबिक शहर में अनावश्यक हॉर्न बजाने और तेज आवाज वाले प्रेशर हॉर्न के कारण ध्वनि प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। इससे आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से अस्थमा के मरीजों, बुजुर्गों, बच्चों और हृदय रोगियों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ता है। लगातार तेज आवाज के कारण तनाव, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और सुनने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्डियोलॉजी क्षेत्र को नो-साइलेंस जोन घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में अनावश्यक हॉर्न बजाने वाले वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अस्पतालों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के आसपास भी हॉर्न न बजाने के निर्देश दिए गए हैं। यातायात पुलिस द्वारा शहर के कई प्रमुख चौराहों पर अभियान चलाकर वाहन चालकों को नियमों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही तेज आवाज वाले हॉर्न हटाने और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ चालान की कार्रवाई भी की जा रही है। इसके अलावा सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि बिना जरूरत हॉर्न का इस्तेमाल न करें और ट्रैफिक नियमों का पालन करें। इस अभियान का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं, बल्कि शहर में ध्वनि प्रदूषण को कम करना और नागरिकों को शांत व सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज किया जाएगा।
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कानपुर में कार्डियोलॉजी बना नो हॉर्न जोन:ट्रैफिक पुलिस ने शुरू की सख्ती, हॉस्पिटल एरिया में हॉर्न बजाना पड़ेगा भारी