![]()
कानपुर कमिश्नरेट पुलिस के बेड़े में BSF (बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्सेज) से ट्रेनिंग पाकर दो ट्रैकर डॉग शामिल किए गए हैं। इनके नाम रोलर और टैडी है। रोलर जर्मन शेफर्ड, जबकि टैडी लैब्राडोर नस्ल का है। डेढ़ साल उम्र के दोनों मेल डॉग्स को ह्यूमन और क्राइम सीन में मिले आर्टिकल को ट्रैक करने में महारत हासिल है। जिसके चलते इन्होंने घाटमपुर में हुए मुमताज हत्याकांड और सजेती में ऑटो ड्राइवर मर्डर केस का खुलासा किया है। इन दोनों डॉग्स के शामिल होने के बाद अब कमिश्नरेट पुलिस के बेड़े में डॉग्स की संख्या तीन हो गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अब जल्द ही एक और डॉग कानपुर पुलिस में शामिल होने वाला है। दो ट्रैकर डॉग्स की हो चुकी थी मौत अपराध के खुलासे में डॉग स्क्वायड पुलिस का हथियार बन गया है। किसी घटना में जब पुलिस को कोई सुराग नजर नही आता तो इनकी भूमिका अहम हो जाती है। चोरी, लूट, हत्या जैसी कई घटनाओं का कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने डॉग्स की मदद से ही पर्दाफाश किया है। पुलिस के डॉग स्क्वायड में तीन श्रेणियां है। पहली है ट्रैकर। इस श्रेणी के दो डॉग्स यामिनी (जर्मन शेफर्ड) और नेक्सन (डॉबर–मैन) शामिल थे। उम्र पूरी होने के बाद उनकी करीब एक साल पहले मौत हो चुकी है। इसके बाद से कमिश्नरेट पुलिस में ट्रैकर डॉग नहीं थे। कानपुर पुलिस लाइन के रिजर्व इंस्पेक्टर राकेश कुमार शर्मा ने बताया कि कमिश्नरेट पुलिस महकमे में पूर्व में तीन डॉग थे, जिनमें दो ट्रैकर डॉग की मौत हो चुकी थी। जिसके बाद मादक पदार्थों को सूंघने में माहिर नारकोटिक्स स्पेशल 8 साल की फीमेल डॉग जिम्मी ही थी। ट्रैकर डॉग की कमी को पूरा करने के लिए लैब्राडोर और जर्मन शेफर्ड नस्ल के टैडी और रोलर को स्क्वायड में शामिल किया गया है। रोजाना 3 घंटे की ट्रेनिंग होती है डॉग स्क्वायड टीम में लंबे समय से सेवा दे रहे हेड कांस्टेबल अरुणेश कुमार ने बताया कि डॉग रोलर के मास्टर कांस्टबेल विपिन कुमार हैं, जबकि टैडी के कांस्टेबल आकाश कुमार। दोनों डॉग्स को उनके मास्टर रोजाना तीन घंटे की ट्रेनिंग देते हैं। रोजाना सुबह करीब 6:30 बजे ट्रेनिंग शुरू होती है। ट्रेनिंग में जो डॉग जिस विधा में माहिर है, उसकी ट्रेनिंग करायी जाती है, फिर डॉग्स की ग्रूमिंग, एक्सरसाइज कराई जाती है। जो करीब 3 घंटे तक चलती है। इसके बाद उन्हें फीडिंग करायी जाती है। इनको नेशनल ट्रेनिंग सेंटर फार डॉग टेकनपुर स्थित बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्सेज से 9 माह का प्रशिक्षण दिया गया है। यह दोनों डॉग मानव गंध के कण को ट्रैक करने, अपराध में इस्तेमाल किए गए किसी भी वस्तु, अपराधियों के फुटप्रिंट को ट्रैक करने में माहिर हैं। इंस्पेक्टर ने बताया कि घटना को अंजाम देने वाला अगर कोई हथियार व पानी का ग्लास तक छूकर जाता है, तो ये डॉग्स उनको कुशलता पूर्वक ट्रैक कर सकते हैं। बशर्ते, क्राइम सीन पर किसी का आवागमन न हुआ हो। यह है डायट चार्ट मास्टर विपिन और आकाश कुमार ने बताया कि- इन घटनाओं का खुलासा किया… देवसढ़ गांव में मुमताज हत्याकांड का रोलर ने किया था खुलासा कानपुर के साढ़ थानाक्षेत्र स्थित देवसढ़ गांव निवासी 30 वर्षीय मुमताज उर्फ कल्लू पराग डेयरी की गाड़ी चलाते थे। वह अपनी पत्नी शाहजहां और 4 महीने की बेटी के साथ परिवार से अलग खेत में मकान बनाकर रहते थे। उनका पुराना घर गांव में ही करीब 1 किलोमीटर दूर है। पत्नी ने बताया था कि वह पहले सऊदी अरब रह चुके हैं। वहां से आने के बाद यहीं ड्राइविंग का काम करने लगे थे। 8 अगस्त 2026 की देर रात पूरा परिवार सो रहा था तभी रात करीब 12 बजे अचानक छत से दो बदमाश घर में घुस आए। सभी ने चेहरे पर काले कपड़े बांध रखे थे। बदमाशों ने शाहजहां को पकड़ लिया और पति से कहा कि तुम्हारे पास जो जेवर हैं, दे दो। इसके बाद पति पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया था, फिर शाहजहां को भी पीट कर मरणासन्न कर दिया था। जिसमें मुमताज की मौत हो गई थी। घटना के बाद आलाधिकारी समेत डॉग स्क्वायड की टीम मौके पर पहुंची थी। डॉग स्क्वायड टीम में शामिल रोलर डॉग ने घटनास्थल पर मौजूद फुटप्रिंट और खून से सने डंडे को सूंघ कर करीब एक किलोमीटर दूर स्थित उसके चचेरे भाई शोयल खान उर्फ रानू के घर पहुंचा था। इस दौरान रानू की मां से पुलिस ने पूछताछ शुरू की तो उसने रानू के घर में होने से इंकार कर दिया था। पुलिस को शक हुआ, जिसके बाद पूछताछ गहरी हुई तो खुलासा हुआ कि घर में लूटपाट के इरादे से ही रानू ने वारदात को अंजाम दिया था। टैडी ने किया ऑटो ड्राइवर मर्डर केस का खुलासा बिनगवां केडीए कॉलोनी गल्ला मंडी निवासी विजय कुमार उत्तम (64) ऑटो चलाते थे। परिवार में पत्नी सीमा व चार बच्चे दीपाली, शैफाली, रूपाली व सुजय हैं। बेटे सुजय ने बताया था कि 3 अगस्त की शाम 6:30 बजे ऑटो लेकर निकले थे, जिसके बाद वापस नहीं लौटे। 4 अगस्त को परिजन खोजबीन करते हुए हनुमंत विहार थाने पहुंचे थे, तो उन्हें अज्ञात शव की फोटो दिखायी गई, जो विजय कुमार का निकला था। जिसके बाद परिजन सजेती थाने पहुंचे, जहां परिजनों को ऑटो गायब मिला था। पुलिस ने जांच शुरू की तो ऑटो आनूपुर मोड़ के पास खड़ा मिला। मौके पर पहुंचे डॉग स्क्वायड टीम ने जांच पड़ताल शुरू की। जिस पर मानव गंध को ट्रैक करने में माहिर डॉग टैडी ने अपना कमाल दिखाया। उसने हैंडल को सूंघा और झाड़ियों से होते हुए आनूपुर मोड़ पर मौजूद चौहान ढाबा के पीछे से होते हुए वह मुख्य मार्ग पर निकला था। इस दौरान पुलिस ने उस रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगालना शुरू किया तो दो संदिग्ध कैमरे में कैद हुए थे। पुलिस ने फुटेज के आधार पर दोनों आरोपियों को अरेस्ट किया था।
Source link
कानपुर पुलिस में शामिल हुए 2 डॉग्स:BSF से ट्रेनिंग मिली, 2 हत्याकांड का खुलासा किया; फुटप्रिंट सूंघकर 1Km दूर हत्यारोपी के घर पहुंचा था