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मुजफ्फरनगर जिला महिला अस्पताल में कांवड़ यात्रा के दौरान जन्मे जुड़वा नवजातों को शुक्रवार को बेहतर उपचार के लिए मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। सात माह में प्री-मैच्योर जन्म और एक नवजात में पीलिया के लक्षण मिलने के बाद चिकित्सकों ने शुक्रवार को दोनों बच्चों और उनकी मां को उच्च चिकित्सा केंद्र भेजने का निर्णय लिया। कांवड़ यात्रा के दौरान हुआ था प्रसव दिल्ली के भलस्वा निवासी 20 वर्षीय नेहा हरिद्वार से कांवड़ यात्रा कर रही थीं। सावन के पहले सोमवार को मुजफ्फरनगर की सीमा में पहुंचते ही उन्हें प्रसव पीड़ा हुई। जिला महिला अस्पताल में उनका सामान्य प्रसव कराया गया, जिसमें उन्होंने जुड़वा बेटों को जन्म दिया। कांवड़ यात्रा के बीच हुए इस प्रसव की काफी चर्चा हुई थी। स्वास्थ्य जांच में सामने आए पीलिया के लक्षण जन्म के बाद से ही दोनों प्री-मैच्योर नवजातों को डॉक्टर की निगरानी में रखा गया था। बुधवार को जांच में एक बच्चे में पीलिया के गंभीर लक्षण मिले। अस्पताल के अनुसार, बच्चे ने मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) पीने के बाद उल्टी कर दी, जबकि दूसरा नवजात भी पूरी तरह स्वस्थ महसूस नहीं कर रहा था। एनआईसीयू सुविधा के लिए मेरठ किया गया रेफर बच्चों की स्थिति को देखते हुए जिला महिला अस्पताल के चिकित्सकों ने शुक्रवार दोपहर दोनों नवजातों और उनकी मां को मेरठ के लाला लाजपत राय स्मारक (एलएलआरएम) मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। चिकित्सकों के अनुसार, समय से पहले जन्म लेने के कारण दोनों बच्चों को उन्नत नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) की आवश्यकता है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. मुरली भास्कर ने बताया कि दोनों नवजातों को बिना देरी किए मेरठ मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। वहां वेंटिलेटर सहित उन्नत नवजात चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि मेरठ के चिकित्सकों को दोनों बच्चों की पूरी मेडिकल हिस्ट्री और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध करा दी गई है, ताकि उपचार तत्काल शुरू किया जा सके।
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कांवड़ यात्रा के दौरान जन्मे जुड़वा नवजात मेरठ रेफर:एक में पीलिया के लक्षण मिलने पर लिया फैसला, SSP ने किया था नामकरण