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लखनऊ के प्रेस क्लब में उत्तर प्रदेश के विभिन्न मान्यता प्राप्त कर्मचारी परिसंघों के अध्यक्षों, महामंत्रियों और प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक एवं प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान कर्मचारियों से जुड़े लंबित मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार संवाद स्थापित करने के बजाय कर्मचारियों की मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है। बैठक में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ के रामराज दुबे, महेंद्र कुमार पांडे, मिनिस्टीरियल फेडरेशन एसोसिएशन के कृतार्थ सिंह, उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के राजेश कुमार सिंह, स्टेनोग्राफर्स एसोसिएशन के राजकुमार, विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति एवं ऑल इंडिया पावर फेडरेशन के शैलेंद्र दुबे, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आर.के. निगम, राजकीय शिक्षक संघ के सत्य शंकर मिश्रा, अरुणा शुक्ला, प्रीति पांडे, नितिन गोस्वामी, शैलेन्द्र सिंह, पवन कुमार सहित कई कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक का संचालन जे.एन. तिवारी ने किया। प्रदेश में नौकरशाही कर्मचारियों के हितों पर हावी प्रेस वार्ता में कर्मचारी नेताओं ने सरकार के कर्मचारी विरोधी रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नौकरशाही कर्मचारियों के हितों पर हावी हो गई है और सामान्य मांगों पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। नेताओं ने पुरानी पेंशन बहाल करने, रिक्त पदों पर भर्ती, लंबित पदोन्नतियां, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती पर लगी रोक हटाने, वर्ष 2001 के बाद नियुक्त संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की नियमावली जारी करने, आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए गठित निगम को लागू करने तथा आठवें वेतन आयोग के समक्ष प्रदेश के कर्मचारी संगठनों को अपनी बात रखने का अवसर देने की मांग दोहराई। कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी हो रहा कर्मचारी नेताओं ने विशेष रूप से आरोप लगाया कि आठवां वेतन आयोग अन्य राज्यों की राजधानियों में जाकर संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से सुझाव ले रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश के मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों को आयोग के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। इसे कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी बताया गया।बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मुख्य सचिव, आठवें वेतन आयोग के अध्यक्ष और सदस्य सचिव को विरोध पत्र भेजा जाएगा।
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कर्मचारी संगठनों ने सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया:लखनऊ में बैठक कर लंबित मांगों पर जताई चिंता, संघर्ष की रणनीति