ओझाई के बहाने महिला से दुष्कर्म, 2 दोषियों को उम्रकैद:कोर्ट ने दोनों पर 1.01 लाख रुपए का लगाया जुर्माना, 9 साल बाद आया फैसला


सोनभद्र में करीब 9 साल पुराने दुष्कर्म मामले में अदालत ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी/सीएडब्ल्यू) बिपिन कुमार तृतीय की अदालत ने ओझा जगदेव शर्मा उर्फ जयदेव शर्मा और उसके सहयोगी लालू शर्मा उर्फ जनार्दन शर्मा को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों दोषियों पर 1 लाख 500 रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना न चुकाने पर छह-छह माह की अतिरिक्त कठोर कैद भुगतनी होगी। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि अर्थदंड की आधी धनराशि पीड़िता को दी जाएगी। जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी। 2017 में दर्ज हुआ था मामला अभियोजन के अनुसार, वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली विवाहिता ने 27 अप्रैल 2017 को रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में तहरीर दी थी। पीड़िता ने बताया था कि वह बीमारी से परेशान थी और मायके चंदौली आई हुई थी। 26 अप्रैल 2017 को उसका भाई उसे उपचार और झाड़-फूंक के लिए सोनभद्र के झपरी गांव निवासी ओझा जगदेव शर्मा के पास ले गया था। उसके साथ लालू शर्मा भी मौजूद था। ‘धार दिलाने’ के बहाने सुनसान स्थान पर ले गया आरोप था कि ओझा ने महिला को देखने के बाद ‘धार दिलाने’ का बहाना बनाया और रात करीब 11 बजे उसे अकेले सुनसान स्थान पर ले गया। वहां उसने महिला के साथ जबरन दुष्कर्म किया और घटना किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने दुष्कर्म, धमकी और आपराधिक षड्यंत्र समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर पुलिस ने जगदेव शर्मा और लालू शर्मा के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। 9 गवाहों के बयान के बाद अदालत ने सुनाया फैसला मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने नौ गवाहों के बयान दर्ज कराए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया। अदालत ने दुष्कर्म, धमकी और आपराधिक षड्यंत्र से जुड़े आरोपों में दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए अर्थदंड भी लगाया। अदालत के फैसले के बाद दोनों दोषियों को जेल भेज दिया गया।

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