एक साल के संघर्ष बाद नांदणी मठ लौटी हथिनी माधुरी:मेरठ में विश्व श्रमण संस्कृति श्रीसंघ के राष्ट्रीय महामंत्री बोले अंत भला तो सब भला


विश्व श्रमण संस्कृति श्रीसंघ के राष्ट्रीय महामंत्री सुदीप जैन ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हथिनी माधुरी की नांदणी मठ वापसी की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि करीब एक साल के लंबे सामाजिक और कानूनी संघर्ष के बाद माधुरी शुक्रवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित नांदणी मठ वापस पहुंच गई। माधुरी 10 सितंबर को गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा से नांदणी के लिए रवाना हुई थी। सुदीप जैन ने कहा कि माधुरी पिछले करीब 35 वर्षों से नांदणी मठ में रह रही थी। पिछले वर्ष उसे वनतारा भेजे जाने के बाद उसकी वापसी के लिए लगातार आवाज उठाई गई। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल जैन समाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशभर के लोगों की जनभावना इससे जुड़ गई। उन्होंने बताया कि नांदणी मठ के पीठाधीश स्वस्ति जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामीजी के मार्गदर्शन में आंदोलन चला। आचार्य कुंथुसागर जी महाराज, आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज, आचार्य गुणधर नंदी जी महाराज, आचार्य पुलक सागर जी महाराज और मुनि आदित्य सागर जी महाराज समेत कई साधु-संतों ने भी माधुरी की वापसी की मांग उठाई। सुदीप जैन ने कहा कि पूर्व सांसद राजू शेट्टी के नेतृत्व में करीब 45 किमी का पैदल मार्च निकाला गया। इसमें जैन समाज के साथ सर्व समाज के लोग शामिल हुए। उन्होंने बताया कि मेरठ से भी उन्होंने इस मुद्दे को लगातार उठाया। पिछले वर्ष अगस्त में लखनऊ के हजरतगंज में बापू की प्रतिमा के सामने धरना देकर रामधुन गाई थी। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों से माधुरी की वापसी के समर्थन में ज्ञापन दिए गए। इंदौर से दर्शन जैन ने सोशल मीडिया के जरिए अभियान को आगे बढ़ाया। मयंक जैन, लखनऊ से सिद्धार्थ जैन और मनीष जैन, बहराइच से शुभम जैन समेत कई लोगों ने अभियान में सहयोग किया। सुदीप जैन बोले- अंत भला तो सब भला, उन्होंने कहा कि इस पूरे संघर्ष में सामाजिक और कानूनी दोनों स्तर पर प्रयास किए गए। “अंत भला तो सब भला। जो बीत गया, उसे छोड़िए। सभी के सकारात्मक सहयोग से हमारी हथिनी माधुरी नांदणी मठ वापस आ गई है।” सुदीप जैन ने महाराष्ट्र सरकार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, वनतारा प्रशासन, अनंत अंबानी परिवार, सुप्रीम कोर्ट और हाई पावर कमेटी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित पक्षों के सकारात्मक रुख के कारण माधुरी की घर वापसी संभव हुई। उन्होंने इसे अहिंसा, पशु संरक्षण, संवेदना और जनभावना के सम्मान की जीत बताया।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *