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यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न और उसके विकल्पों को लेकर ब्राह्मण समाज सहित कई नागरिकों में गहरी नाराजगी और पीड़ा है। सवाल और विकल्प न केवल असंवेदनशील माने जा रहे हैं, बल्कि किसी विशेष समाज की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले प्रतीत होते हैं। ब्राह्मण स्वाभिमान एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश तिवारी ने कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में इस प्रकार की भाषा और भावनाओं का स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों से मांग की कि इस गंभीर प्रकरण को पूर्ण संवेदनशीलता के साथ लिया जाए। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग तिवारी ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान की जाए और उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि ऐसा होना भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकेगा। सामाजिक सम्मान और संवैधानिक अधिकार ब्राह्मण समाज ने सदैव राष्ट्र-निर्माण, शिक्षा, संस्कृति और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में अग्रणी भूमिका निभाई है। तिवारी ने कहा कि किसी भी समाज को अपमानित करने या उपहास का विषय बनाने का अधिकार किसी व्यक्ति, संस्था या तंत्र को नहीं है। संविधान सबको समान सम्मान और गरिमा का अधिकार देता है। परीक्षा सामग्री की समीक्षा और जवाबदेही की अपील उन्होंने सरकार से यह भी अपील की कि प्रश्न-पत्र निर्माण की प्रक्रिया में सख्त मानक, बहु-स्तरीय समीक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान बना रहे।
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उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में आपत्तिजनक प्रश्न:ब्राह्मण समाज में नाराजगी, ब्राह्मण स्वाभिमान एकता मंच ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की