ईरान जंग में खर्च हुईं चीन के लिए रिजर्व मिसाइलें:अमेरिका का मिसाइल स्टॉक खत्म होने के करीब; हर दिन ₹90 अरब खर्च


ईरान के साथ 38 दिन चले युद्ध में अमेरिका ने अपनी सबसे अहम रिजर्व मिसाइलें भी खर्च कर दी हैं। चीन से बड़े युद्ध के लिए तैयार की गई कई हाईटेक मिसाइलें इस संघर्ष में इस्तेमाल हो गईं, जिससे अमेरिकी हथियार भंडार तेजी से खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। अमेरिका ने इस युद्ध में करीब 1100 लंबी दूरी की स्टील्थ क्रूज मिसाइल JASSM-ER का इस्तेमाल किया। ये मिसाइलें खासतौर पर चीन के खिलाफ संभावित युद्ध के लिए बनाई गई थीं। इसके अलावा 1000 से ज्यादा टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें, 1200 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर और 1000 से ज्यादा ATACMS व अन्य प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइलें भी इस्तेमाल कीं। इस युद्ध पर कुल खर्च 28 से 35 अरब डॉलर के बीच रहा, यानी रोजाना करीब 1 अरब डॉलर (लगभग 90 अरब रुपए) खर्च हुए। युद्ध रुकने के दो हफ्ते बाद भी पेंटागन ने इस्तेमाल किए गए हथियारों का पूरा आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है। हालांकि मंत्रालय ने दावा किया है कि 13,000 से ज्यादा टारगेट पर हमला किया गया। लेकिन अधिकारी मानते हैं कि एक टारगेट पर कई बार हमला किया गया, इसलिए असल में इस्तेमाल हथियारों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है। मिसाइलों का स्टॉक तेजी से कम हुआ युद्ध के दौरान अमेरिका ने जिन हथियारों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया, उनमें लंबी दूरी की JASSM-ER स्टेल्थ क्रूज मिसाइलें शामिल हैं। ये मिसाइलें 600 मील से ज्यादा दूरी तक मार कर सकती हैं और दुश्मन की एयर डिफेंस से बचकर हमला करने के लिए बनाई गई हैं। इसी तरह टॉमहॉक मिसाइलों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। अमेरिका सालभर में जितनी खरीद करता है, उससे 10 गुना ज्यादा मिसाइलें इस युद्ध में खर्च हो गईं। एक स्टडी के मुताबिक, अब इनके स्टॉक करीब 3000 रह गए हैं। वहीं, पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें भी तेजी से खत्म हुई हैं। इनकी कीमत करीब 4 मिलियन डॉलर प्रति मिसाइल है। 2025 में अमेरिका ने कुल 600 बनाई थीं, जबकि युद्ध में 1200 से ज्यादा इस्तेमाल हो गईं। इसके अलावा 1000 से ज्यादा प्रिसिजन स्ट्राइक और ATACMS मिसाइलें भी मिसाइलें भी खर्च हो चुकी हैं। पेंटागन के अनुमान के मुताबिक, कुछ अहम हथियार पहले से ही कम थे, जो अब और घट गए हैं। व्हाइट हाउस ने हथियार खत्म होने का दावा खारिज किया व्हाइट हाउस ने हथियार खत्म होने के इन दावों को खारिज किया है। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है और उसके पास पर्याप्त हथियार मौजूद हैं। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने भी किसी खास क्षेत्र या स्टॉक की जानकारी देने से इनकार किया और इसे ऑपरेशनल सिक्योरिटी का मामला बताया। युद्ध के शुरुआती दो दिनों में ही 5.6 अरब डॉलर के हथियार इस्तेमाल हुए थे। इसके अलावा कुछ सैन्य ऑपरेशन में नुकसान भी हुआ। ईरान से पायलट को निकालने के रेस्क्यू मिशन के दौरान दो MC-130 विमान और तीन हेलीकॉप्टर नष्ट करने पड़े, जिनकी कुल कीमत करीब 275 मिलियन डॉलर बताई गई। एशिया और यूरोप में तैनात हथियारों को भी मिडिल-ईस्ट भेजा हथियारों की कमी के चलते अमेरिका को एशिया और यूरोप से भी सैन्य संसाधन मिडिल ईस्ट भेजने पड़े। इससे इन क्षेत्रों में तैनात सेना की तैयारी पर असर पड़ा है। यूरोप में NATO की पूर्वी सीमा की सुरक्षा से जुड़े हथियारों में कमी आई है। वहीं, एशिया में भी असर ज्यादा दिखा है। साउथ चाइना सी से USS अब्राहम लिंकन कैरियर ग्रुप को हटाकर मिडिल ईस्ट भेजा गया। इसके अलावा दो मरीन यूनिट भी वहां तैनात की गईं। दक्षिण कोरिया में तैनात THAAD मिसाइल सिस्टम के इंटरसेप्टर भी पहली बार वहां से हटाए गए हैं। ये सिस्टम उत्तर कोरिया के खतरे से निपटने के लिए लगाया गया था। इससे पहले भी अमेरिका अपने जहाज और विमान मिडिल ईस्ट में तैनात कर चुका है, खासकर 2023 में इजराइल-गाजा युद्ध और यमन में हूती हमलों के बाद। पिछले साल हूती के खिलाफ ऑपरेशन में ही 1 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च हुआ था। हथियारों का स्टॉक भरना सबसे बड़ी चुनौती अमेरिका के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती हथियारों के भंडार को दोबारा भरने की है। सीनेट की आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के डेमोक्रेट सदस्य जैक रीड ने कहा कि मौजूदा उत्पादन दर पर स्टॉक को पहले जैसा करने में कई साल लग सकते हैं। पेंटागन ने हथियार उत्पादन बढ़ाने के लिए लॉकहीड मार्टिन जैसी कंपनियों के साथ 7 साल के समझौते किए हैं, लेकिन फंडिंग की कमी के कारण अभी तक उत्पादन बढ़ाने का काम शुरू नहीं हो सका है। इस बीच, रक्षा विशेषज्ञ मार्क कैंसियन का कहना है कि कुछ अहम मिसाइलों का स्टॉक पहले ही कम था, जो अब और घट गया है। इससे अमेरिका की वैश्विक सैन्य रणनीति पर दबाव बढ़ सकता है।

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