इकलौते बेटे को बचाने में डूब गई मां:हमीरपुर में नाव पलटने से 6 डूबे लोगों का शव मिला, डीजे की आवाज में दब गईं चीखें


हमीरपुर में नदी में नाव पलटने से मां-बेटे समेत 6 लोगों की डूबकर मौत हो गई। बेटे को बचाने के लिए मां भी नदी कूदी लेकिन उसे बचा नहीं सकी। गांव वालों का कहना कि मां को तैरना आता था। वह अपने इकलौते बेटे को बचाने में बाहर नहीं निकल पाई और तेज बहाव में बह गई। काफी देर तक अपने इकलौते बेटे को ढूंढते-ढूंढते वह डूब गई। रेस्क्यू टीम ने सभी छह शव बरामद कर लिए हैं। शुक्रवार यानी आज सभी का अंतिम संस्कार होना है। इस घटना से पूरे गांव में मातम पसरा है। शादी के घर में हुए खुशियों की जगह चीखें गूंज रही हैं। मामला जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर कुरारा थाना क्षेत्र का है। हादसा कैसे हुआ? जान लीजिए- नाव में तीन लोगों को आता था तैरना परिजनों का कहना है कि नाव में कुल नौ लोग सवार थे। इनमें सिर्फ विष्णु, गुलाब और बृजरानी को ही तैरना आता था। हादसे के दौरान विष्णु ने किसी तरह रिंकू और पारुल को बाहर निकाला, जबकि गुलाब ने भी बचाव का प्रयास किया। बाकी बच्चे तैरना नहीं जानते थे। बृजरानी रिश्तेदारी में शादी समारोह में शामिल होने आई थी। परिजनों ने बताया कि वह तैरना जानती थी। नाव पलटने के बाद वह बाहर आ सकती थी, लेकिन अपने इकलौते पांच साल के बेटे लव्यांश को डूबते देख वह उसे बचाने के लिए गहरे पानी में उतर गई। विष्णु ने बताया कि बेटे को बचाने के प्रयास में वह तेज बहाव में बह गई। काफी देर तक संघर्ष करने के बाद वह डूब गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते मदद मिल जाती तो शायद मां-बेटे की जान बच सकती थी। एक ही कक्षा में पढ़ते थे चचेरे भाई-बहन हादसे का शिकार हुए चचेरे भाई-बहन आदित्य और अर्चना कक्षा छह के छात्र थे। दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे। दोनों की उम्र में एक साल का अंतर था। हादसे की सूचना पर अर्चना का बड़ा भाई अमित घर पहुंचा। अमित ने बताया कि अर्चना दो भाइयों में मझली थी। छोटा भाई संदीप भी शादी में गया था। आदित्य का एक छोटा भाई आशीष है। पिता सर्वेश और चाचा महेश ट्रक चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। घर में अकेली थीं दादी जशोदा। पड़ोसी महिलाएं उन्हें ढाढ़स बंधा रही थीं। जशोदा ने बताया कि बेटे महेश के साले की बेटी की शादी में सभी लोग पांच मई को हमीरपुर गए थे। बड़े बेटे सर्वेश की बेटी अर्चना भी साथ गई थी। डीजे की आवाज में दब गईं चीखें ग्रामीण देशराज ने बताया कि करीब 20 से 30 मिनट तक नदी किनारे अफरा-तफरी रही। अंधेरा और तेज बहाव के कारण बचाव कार्य में दिक्कत आई। सूचना देर से मिलने पर प्रशासन को पहुंचने में समय लगा। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फ्लड पीएसी और गोताखोरों ने रातभर सर्च ऑपरेशन चलाया। लोगों का कहना है कि डीजे की तेज आवाज के कारण चीख-पुकार दब गई, जिससे समय पर मदद नहीं मिल सकी।
यमुना पार नाव ही एकमात्र सहारा गांव से यमुना पार कर कानपुर नगर के घाटमपुर क्षेत्र स्थित कुटरा मकरंदपुर और आसपास के गांवों में आने-जाने के लिए नाव ही एकमात्र सहारा है। ग्रामीण खेती, सब्जी की बाड़ी और बाजार के काम के लिए रोज जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। लोगों का कहना है कि यदि इस मार्ग पर पुल होता तो यह हादसा नहीं होता। हादसे के बाद ग्रामीणों ने पुल निर्माण की मांग तेज कर दी है। करीब 800 आबादी वाले इस गांव के लोगों की जिंदगी यमुना नदी पर टिकी है। अधिकांश लोग यमुना पार खेती करते हैं और रोज नाव से नदी पार करते हैं। बच्चे भी नाव से स्कूल जाते हैं। ग्रामीण अंकित ने बताया कि कई छात्र-छात्राएं आज भी नाव के सहारे स्कूल जाते हैं। बरसात में स्थिति और खतरनाक हो जाती है। ग्रामीण लंबे समय से सुरक्षित आवागमन की मांग कर रहे हैं। ———————————– ये खबर भी पढ़ेंः- गर्लफ्रेंड को मारकर फेंका, जानवर पूरा शरीर खा गए:परिवार को सिर्फ हडि्डयां मिलीं; प्रयागराज में मां बोली- एक के बदले 4 जान चाहिए प्रयागराज में 17 साल के लड़के ने 9वीं में पढ़ने वाली गर्लफ्रेंड की हत्या कर दी। 17 दिन तक लाश झाड़ियों में पड़ी सड़ती रही। पूरा शरीर जानवर खा गए। छात्रा के घरवाले पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे तो उन्हें शव के नाम पर बेटी के कपड़े और हडि्डयां ही मिलीं। शव का इतना बुरा हाल था कि उसे देख मां सुनीता पाल बेहोश हो गईं। पढ़ें पूरी खबर…

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *