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ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं मुख्यवादी आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कुछ कथित व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों का हवाला देते हुए दावा किया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के प्रयास किए गए थे। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए प्रशासन को शिकायत भेजी है। साथ ही उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराकर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई है। आशुतोष ब्रह्मचारी ने जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य महाराज से जुड़े कथित वीडियो, ऑडियो एवं डिजिटल साक्ष्यों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को विस्तृत शिकायत भेजी है। आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज का कहना है कि उनके पास स्वामी रामभद्राचार्य जी से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री उपलब्ध है, जिसे वे किसी भी सक्षम जांच एजेंसी को सौंपने के लिए तैयार हैं। उन्होंने मांग की है कि हाल ही में प्रसारित वीडियो सामग्री, उसके निर्माण की परिस्थितियों तथा उसमें शामिल व्यक्तियों, विशेष रूप से रामचंद्र दास उर्फ जय मिश्रा की भूमिका की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। आवश्यकता पड़ने पर वीडियो एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का तकनीकी और फॉरेंसिक परीक्षण भी कराया जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि स्वामी रामभद्राचार्य का बयान किसी भी प्रकार के बाहरी प्रभाव से मुक्त वातावरण में किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दर्ज कराया जाए। साथ ही वर्षों से उनके साथ जुड़े शिष्यों, सेवकों एवं सहयोगियों के बयान भी लिए जाएं ताकि पूरे मामले की वस्तुस्थिति सामने आ सके। व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकॉर्ड का भी किया जिक्र आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने अपनी शिकायत में कुछ कथित व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार इन चैट में रामचंद्र दास उर्फ जय मिश्रा और अन्य व्यक्तियों के बीच हुई बातचीत दिखाई गई है, जिसमें कथित रूप से कुछ धार्मिक व्यक्तियों एवं संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई कराने, शिकायत दर्ज कराने और प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क कराने जैसी बातें दर्ज हैं। शिकायत के अनुसार उपलब्ध चैट में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एवं उनके शिष्य मुकुंदानंद के विरुद्ध पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने की चर्चा दिखाई गई है। साथ ही शिकायतकर्ता को थाना स्तर पर तहरीर देने और आगे अधिकारियों से संपर्क कराने का आश्वासन दिए जाने का भी दावा किया गया है। कथित चैट में “आप केवल तहरीर दे दो”, “मैं फोन कराऊंगा”, “अवनीश अवस्थी जी से बात करता हूं” और “रुको” जैसे संदेश होने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन संदेशों की सत्यता और परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। धार्मिक संस्थाओं में हस्तक्षेप के आरोप शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उपलब्ध चैट में विभिन्न आश्रमों एवं धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन, कब्जे संबंधी विवादों तथा वहां रहने वाले संतों एवं सेवकों को हटाने को लेकर भी बातचीत दर्ज है। आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज का कहना है कि यदि ये डिजिटल साक्ष्य जांच में सही पाए जाते हैं तो यह धार्मिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है। निष्पक्ष जांच की मांग आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं है, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराना है। उन्होंने मांग की है कि व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्ड, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और कथित प्रशासनिक संपर्कों की स्वतंत्र जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार का षड्यंत्र, दबाव, झूठा मुकदमा दर्ज कराने का प्रयास अथवा धार्मिक संस्थाओं में अवैध हस्तक्षेप हुआ है तो उसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए। साथ ही उन्होंने स्वामी रामभद्राचार्य की सुरक्षा, स्वतंत्रता और सम्मान सुनिश्चित किए जाने की भी मांग की है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में आरोपित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की पुष्टि और आरोपों की सत्यता जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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आशुतोष महाराज ने जारी किया डिजिटल साक्ष्य:अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की साजिश का किया पर्दाफाश