श्रीनगर6 मिनट पहलेलेखक: हारून रशीद
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एलओसी पर किशनगंगा नदी तट पर लगाए सैकड़ों टेंट।
एलओसी (लाइन ऑफ कंट्रोल) पर बसे 3770 की आबादी वाले केरन गांव में रोज 3000 पर्यटक पहुंच रहे हैं। गुरेज, तंगधार, टीटवाल, उरी और तुलैल घाटी के गांवों में खुले होमस्टे भर चुके हैं और किशनगंगा नदी के किनारे लगाए गए टेंट में अब जगह नहीं बची है। एलओसी कश्मीर का नया पर्यटन केंद्र बन गया है।
यहां 7 साल में पर्यटकों की संख्या 51 गुना बढ़ गई है। जहां 2020 में यहां सिर्फ 7900 पर्यटक आए थे, वहीं इस साल अब तक 4 लाख पर्यटक पहुंच चुके हैं। उम्मीद है कि साल खत्म होते-होते यह संख्या 7 लाख पार कर जाएगी।
जबकि अब तक यहां सबसे ज्यादा पर्यटकों का रिकॉर्ड 2024 में था, तब यहां 3.43 लाख पर्यटक आए थे। जहां कभी गोलियां चलती थीं, वहां यह बदलाव भारत-पाकिस्तान के बीच फरवरी 2021 में सीजफायर एग्रीमेंट के बाद आना शुरू हुआ है।

पीओके के गांव देखने एलओसी आ रहे टूरिस्ट
गुलमर्ग-पहलगाम जैसे पर्यटन स्थलों को छोड़कर लोग भारत की धरती से पीओके के गांव देखने एलओसी आ रहे हैं। झेलम-किशनगंगा के खूबसूरत नजारों के बीच सेल्फी ले रहे हैं, रील्स बना रहे हैं।
स्थानीय कश्मीरियों की मेहमाननवाजी और उनके खानों का लुत्फ ले रहे हैं। यहां की नून चाय की चुस्की के बीच यहां के नजारों को अपने कैमरों में कैद कर रहे हैं।

नियंत्रण रेखा पर वर्षों से बंद पड़े कई इलाके धीरे-धीरे पर्यटकों के लिए खुलने लगे हैं।
पुस्तैनी घरों को लोग होमस्टे बना रहे हैं
स्थानीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह बदल गई है। रोजगार की तलाश में गांव छोड़कर शहर गए परिवार वापस लौट अपने पुस्तैनी घरों को होमस्टे बना रहे हैं। 2021 के संघर्ष विराम के बाद नियंत्रण रेखा पर वर्षों से बंद पड़े कई इलाके धीरे-धीरे पर्यटकों के लिए खोले गए।
पाक बॉर्डर इलाकों में भी कारोबार बढ़ा
एलओसी पर सिर्फ भारत ही नहीं, पाकिस्तान की तरफ भी पर्यटन तेजी से बढ़ा है। पर्यटकों की वजह से कारोबार भी बढ़ा है। होमस्टे और दुकानें खुल रही हैं। बॉर्डर के इस पार स्थानीय निवासी बशीर अहमद कहते हैं, दोनों तरफ पर्यटक आते हैं। कोई डर नहीं दिखता।
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