आजम खान के करीबी सपा नेता डक्कू अकेले पड़ गए:करीबी महानगर अध्यक्ष की तलाश में दबिश पड़ रही; पत्र भेज दर्द बयां किया


जफर अमीन उर्फ डक्कू, सपा में किसी बड़े पद पर नहीं रहे लेकिन उनका कद भी कभी छोटा नहीं रहा। पार्टी के मुस्लिम चेहरा आजम खान के वह काफी करीबी रहे और यही कारण था कि उनकी ठसक साफ नजर आती थी। कभी जिलाध्यक्ष या महानगर अध्यक्ष पद के लिए उनका दावा भी नजर नहीं आया लेकिन जब-जब सपा सत्ता में रही, डक्कू प्रभावशाली रहे। लेकिन इस समय वह जेल में हैं। आजम खान भी जेल में हैं। आजम का यह करीबी नेता आज अपनी ही पार्टी में अकेला पड़ गया है। जेल से लिखा उनका एक पत्र वायरल है और उसमें उनका यह दर्द भी छुपा है कि उनकी पार्टी उनके साथ खड़ी नहीं है। उनका करीबी नेता शब्बीर कुरैशी महानगर अध्यक्ष है, उसी मामले में वह फरार है, तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। मामला सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के संज्ञान में भी है लेकिन अभी तक उनकी ओर से भी कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया। डक्कू के पत्र में निशाने पर वर्तमान जिलाध्यक्ष ब्रजेश कुमार गौतम हैं। उन्होंने उनके प्रयासों पर तीखी टिप्पणी करते हुए यहां तक कह दिया कि वह जेल में उनसे मिलने न आएं। साथ ही 3 पार्षदों के भी न आने की बात कही है। इसमें से एक उनके विरोधी माने जाते हैं। अब डक्कू किसी तरह इस मामले को मैनेज कर जेल से बाहर आना चाहते हैं। इसके लिए समय-समय पर वह भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं के दरवाजे भी खटखटा रहे हैं। सपा के जिलाध्यक्ष ने भी इशारों में यह बात कही है। पहले जानिए किस मामले में जेल में बंद हैं डक्कू डक्कू एक जमीन कब्जा करने और विपक्षी को धमकाने के प्रयास में जेल में बंद हैं। हालांकि उनका दावा है कि जिस जमीन को कब्जाने की बात कही जा रही है, वह उन्होंने बैनामा ली है और उसके दस्तावेज उनके पास हैं। जिस दिन घटना हुई और वीडियो वायरल हुआ, उस दिन भी रात 9:30 बजे तक वह निश्चिंत थे। पुलिस ने भी इस मामले में दोनों पक्षों को कागज के साथ बुलाया था। उस समय तक कार्रवाई की सुगबुगाहट नहीं थी। फिर अचानक देर रात एफआईआर होती है और आधी रात में डक्कू घर से गिरफ्तार कर लिए जाते हैं। 10 दिन बीत गए, वह जेल में ही हैं।
इसी मामले में उनके साथ सपा के महानगर अध्यक्ष शब्बीर कुरैशी भी गए थे। केस शब्बीर पर भी है लेकिन वह फरार चल रहे हैं। उनकी तलाश में दबिश जारी है। पहले दिन उनके घर के हर कोने में, यहां तक कि फ्रिज, कूलर, आलमारी में भी उन्हें ढूंढा गया था। सपा मुखर क्यों नहीं हो पा रही? इस मामले में फंसे दोनों नेता सपा के प्रमुख चेहरे हैं। डक्कू कद्दावर सपा नेता हैं तो शब्बीर वर्तमान महानगर अध्यक्ष। यह मामला सपा प्रमुख अखिलेश यादव के संज्ञान में है, पल-पल की जानकारी दी गई है। गुरुवार को जेल से आए डक्कू के पत्र की सूचना भी उनतक पहुंच गई है। सपा नेता को यह भी पता है कि कोई गोरखनाथ मंदिर में उनकी सिफारिश लेकर गया था। सपा नेता लखनऊ में सपा प्रमुख से मिलकर आए हैं लेकिन उनकी ओर से कोई निर्देश नहीं दिया गया। निर्देश होता तो धरातल पर नजर आता।
सपा के एक वरिष्ठ नेता ने इसका कारण बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी इसे डक्कू का निजी मामला मान रही है। दूसरा, प्रभावशाली रहते हुए अधिकर नेताओं से उनके संपर्क तल्ख रहे। बेबाक छवि के कारण कई नेताओं से उनके अच्छे संबंध नहीं रह गए। सबसे प्रमुख कारण यह है कि जिस परिवार से विवाद है, वह भी मुस्लिम हैं। PDA पर पूरी राजनीति कर रहे अखिलेश यादव इसी कारण इस विषय से दूर हैं। उनकी ओर से अपने महानगर अध्यक्ष को लेकर भी कोई बयान नहीं आया है। सपा नेता कहते हैं कि संगठन को इस बात का डर है कि इस मामले को कहीं अधिक उछाला गया तो भाजपा को मौका मिल जाएगा। मुस्लिम की जमीन कब्जा जैसे आरोपों का जवाब दे पाना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। इसलिए पार्टी ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है। जानिए सपा जिलाध्यक्ष ने क्या कहा?
पत्र वायरल होने के बाद सपा जिलाध्यक्ष्र की तीखी प्रतिक्रिया आयी थी। उन्होंने भावावेश में कहा था कि डक्कू क्या मुझसे या पार्टी से पूछकर जमीन कब्जा करने गए थे। शुक्रवार की शाम तक उनका लहजा सरल हो चुका था लेकिन पत्र की चुभन बरकरार है। उन्होंने डक्कू को अपना बड़ा भाई बताते हुए कहा कि उनका आदेश है कि मिलने न जाऊं तो उसका पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि महानगर अध्यक्ष से भी उनकी कोई बात नहीं हुई है। पार्टी नेताओं के लिए पूरा प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के संज्ञान में यह मामला है। जिससे विवाद है वह भी मुस्लिम पक्ष है। यह डक्कू का व्यक्तिगत मामला है।
हालांकि सोशल मीडिया पर जनार्दन चौधरी नाम के नेता ने इस बात को लेकर सपा जिलाध्यक्ष की आलोचना की है। उन्होंने जिलाध्यक्षके बयान को बचकाना बताया है।
दो बार चुनाव लड़ चुके हैं डक्कू डक्कू एक कद्दावर नेता हैं। 1991 में वह जनता दल के टिकट पर गोरखपुर शहर से विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। इस चुनाव में उन्हें 20.10 प्रतिशत वोट मिले थे। राम मंदिर लहर में हुए इस चुनाव में शिव प्रताप शुक्ला 55 प्रतिशत से अधिक वोट पाकर विधायक बने थे। डक्कू 2012 में नवगठित गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा सीट से चुनाव लड़े। इस बार 22.27 प्रतिशत वोट मिले। इस चुनाव में भाजपा के विजय बहादुर यादव विजयी बने थे। डक्कू 2012 से 2017 की सपा सरकार में वह काफी प्रभावशाली रहे। आजम खान नगर विकास मंत्री थे और गोरखपुर की नगर निगम व नगर पंचायतों में डक्कू की तूती बोलती थी।

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