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आजमगढ़ जिले की सगड़ी तहसील के घाघरा नदी में आई बाढ़ से चार दर्जन से अधिक गांव संपर्क मार्ग से टूट गए हैं। इन गांवों के रास्तों पर पानी भर गया है। ऐसे में यहां पर रहने वाले लोगों के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बनी हुई है। बाढ़ से 100 बीघा से अधिक की फसल पूरी तरह से जलमग्न हो गई है। इन बाद प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों के बच्चे ना तो स्कूल जा पा रहे हैं और ना ही पशुओं के लिए चारा मिल रहा है। गांव के व्यक्तियों के बीमार हो जाने पर भी काफी समस्या हो रही है। सगड़ी तहसील के बेलहिया ढाला जहां पर 10 साल पहले बना पुल बह गया है। ऐसे में लोग जान जोखिम में डालकर पानी के रास्ते अपने घरों को जा रहे हैं। इलाके के लोगों का कहना है कि यहां पर पुल बनवाया जाए जिससे कि हम लोगों की समस्या का समाधान हो। जिला प्रशासन द्वारा जो बाढ़ के इलाकों में चौकियां बनाई गई हैं। वहां से कर्मचारी नदारद हैं। जिन इलाकों में जिला प्रशासन द्वारा नाव चलाई जा रही थी। वह लगभग बंद हो चुकी है। ऐसे में आसपास के लोगों की मदद से अपने गांव पहुंचने के लिए नाव की व्यवस्था स्वयं की जा रही है। इस बात की पुष्टि दैनिक भास्कर ने जब जमीनी पड़ताल की तो उसमें हुई। हालांकि 4 दिन पूर्व प्रदेश सरकार के मंत्री दारा सिंह चौहान और जिले के डीएम रविंद्र कुमार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचकर बाढ़ राहत सामग्री का वितरण किया था। इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में व्यवस्था चुस्त दुरुस्त किए जाने का वायदा भी किया था पर ग्रामीण जिला प्रशासन के दावों से खुश नहीं है। बच्चों के स्कूल से लेकर पशुओं के चारे तक की समस्या
दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए सगड़ी तहसील के खरौलिया ढाला नाव के सहारे पहुंचे उमेश पटेल ने बताया कि आने-जाने में समस्या हो रही है घर के चारों तरफ पानी भरा हुआ है। हम लोगों के साथ ही हम लोगों के घर के बच्चों को स्कूल जाने में काफी दिक्कत हो रही है। कई प्राइमरी स्कूलों के पास भी पानी भर गया है। इसके साथ ही चार दर्जन से अधिक गांव का संपर्क मार्ग टूट गया है। पशुओं के चारे की समस्या के साथ गांव का यदि कोई व्यक्ति बीमार हो जा रहा है तो उसे भी डॉक्टर के पास ले जाने में काफी समस्या हो रही है। ऐसे में हमारी मांग है कि यहां पर पुल का निर्माण हो जाए जिससे हम लोगों की समस्या का समाधान हो जाए। बच्चों को स्कूल जाने में सबसे अधिक समस्या
दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए वृद्ध फूलमती का कहना है कि छोटे बच्चों को स्कूल जाने में सबसे अधिक समस्या आ रही है। इसके साथ ही पशुओं के चारे का भी संकट है। चारों तरफ पानी भरा हुआ है। फूलमती का भी कहना है कि पुल बन जाए जिससे हम लोगों की समस्या का समाधान हो जाए। पानी से होकर घर जा रहे हैं कई गांव के लोग
दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए बेलहिया ढाला इलाके के गांव के रहने वाले मुरारी ने बताया कि हमारे गांव के आसपास के लगभग एक दर्जन गांव का संपर्क मार्ग पूरी तरह से पानी में डूब गया है। ऐसे में हम लोगों को पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। हमारी मांग है की रास्ता क्लियर हो जाए जिससे हम लोगों की समस्या का समाधान हो जाए। पानी से होकर गुजर रही महिलाओं और बच्चों के साथ कभी भी कोई घटना हो सकती है। 10 वर्ष पहले बह गया था पुल लगातार मिलता रहा आश्वासन
दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए वीरेंद्र यादव का कहना है कि बेलहिया ढाला के पास पूर्व विधायक रहे राम प्यारे सिंह ने पुल बनवाया था जो लगभग 10 वर्ष पूर्व बाढ़ में बह गया। तब से लेकर आज तक बहुत से लोग आए और पुल बनवाने का आश्वासन दिया पर आज तक पुल का निर्माण नहीं हुआ। ऐसे में हम लोगों को काफी समस्या हो रही है पानी से होकर अपने गांव जाना पड़ रहा है। इसके साथ ही बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कत के साथ ही पशुओं के चारे का संकट है। बीमार पड़ने पर हॉस्पिटल जाने में भी काफी समस्या आ रही है। आपदा में अवसर
जहां एक तरफ बढ़ से सैकड़ो बीघा फसल डूब गई है। आने जाने वाले कई रास्तों पर पानी भर गया है। संपर्क मार्ग पानी से डूबे हुए हैं। ऐसे में कई लोग आपदा में अवसर तलाश रहे हैं। लगातार बढ़ रहे घाघरा के जलस्तर में जहां कई शिकारी जाल डालकर मछलियों का शिकार कर रहे हैं। वहीं सगड़ी तहसील के मानिकपुर ढाला के पास कई युवक अपनी बाइक और गाड़ियों की धुलाई कर रहे हैं। तो कई बाढ़ के पानी में नहा रहे हैं। जहां एक तरफ बाढ़ प्रभावित बड़ी संख्या में लोग परेशान दिख रहे हैं। वहीं इन लोगों के चेहरे पर खुशी देखी जा सकती है।
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आजमगढ़ के बाढ़ प्रभावित इलाकों में नाव बनी सहारा:चार दर्जन से अधिक गांव के संपर्क मार्ग पर भरा पानी, सूनी पड़ी बाढ़ चौकियां