आगरा में मनाया गया गुरु अर्जन देव का शहीदी दिवस:विशेष कीर्तन समागम के साथ छबील और लंगर का हुआ आयोजन


सिख धर्म के पांचवें गुरु एवं शहीदों के सरताज गुरु अर्जन देव सिंह जी महाराज के शहीदी दिवस पर बुधवार को आगरा के विभिन्न गुरुद्वारों में श्रद्धा और सेवा भाव के साथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। गुरुद्वारा गुरु का लाल और गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा माईथान में विशेष कीर्तन समागम, मीठे शरबत की छबील और गुरु का अटूट लंगर आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संगत ने भाग लिया। सिख धर्म के पांचवें गुरु एवं शहीदों के सरताज गुरु अर्जन देव जी महाराज के शहीदी दिवस पर शहर के विभिन्न गुरुद्वारों में श्रद्धा, सेवा और सिमरन के साथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। गुरुद्वारा गुरु का लाल में हर वर्ष की तरह इस बार भी आगरा-दिल्ली हाईवे स्थित मुख्य द्वार पर मीठे शरबत की विशाल छबील लगाई गई। इसमें गुरुद्वारा आने वाली संगत के साथ-साथ हाईवे से गुजर रहे यात्रियों को भी भीषण गर्मी में शीतल शरबत वितरित किया गया। छबील की शुरुआत गुरुद्वारा के मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह ने अरदास के साथ की। उन्होंने गुरु अर्जन देव जी की शहादत का स्मरण करते हुए बताया कि गुरु साहिब ने मुगलिया हुकूमत की कठोर यातनाओं को शांतचित्त होकर सहा और धर्म तथा मानवता के सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। इसी स्मृति में शहीदी दिवस पर छबील लगाने की परंपरा निभाई जाती है। कार्यक्रम के दौरान संगत ने सेवा भाव से छबील तैयार करने, वितरण करने और अन्य व्यवस्थाओं में योगदान दिया। महिलाओं ने नाम सिमरन करते हुए सेवा निभाई, वहीं श्रद्धालुओं को चने का प्रसाद भी वितरित किया गया। मीडिया प्रभारी जसवीर सिंह ने बताया कि सुबह शुरू हुई छबील देर रात तक जारी रही। इस दौरान दरबार साहिब में निरंतर शब्द कीर्तन और गुरबाणी गायन हुआ तथा संगत ने गुरु का अटूट लंगर ग्रहण किया। वहीं गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, माईथान में भी शहीदी दिवस पर विशेष कीर्तन समागम आयोजित किया गया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पावन हजूरी में रहिरास साहिब के पाठ के साथ दीवान आरंभ हुआ। हजूरी रागी भाई लखविंदर सिंह ने कीर्तन दरबार की शुरुआत की, जबकि लुधियाना से आए रागी भाई बलप्रीत सिंह ने गुरबाणी कीर्तन से संगत को निहाल किया। उन्होंने गुरु अर्जन देव जी के जीवन, त्याग और शहादत पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया। गुरुद्वारा माईथान के प्रधान कवलदीप सिंह ने कहा कि गुरु अर्जन देव जी की शहादत अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध सत्य तथा धर्म पर अडिग रहने की प्रेरणा देती है। कार्यक्रम के समापन पर अरदास और हुकुमनामा हुआ। गुरुद्वारा परिसर के बाहर मीठे शरबत की छबील लगाई गई तथा विभिन्न व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए। अंत में संगत ने पंक्तिबद्ध बैठकर गुरु का अटूट लंगर ग्रहण किया ।

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