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शहर में सड़कों किनारे कई नाले खुले पड़े हैं। ये नाले हादसों को दावत दे रहे हैं। इस बारिश में अब तक तीन लोग इन नालों में गिरकर अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद नगर निगम के अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सो रहे हैं। बारिश के दौरान स्थिति और खतरनाक हो जाती है। सड़क किनारे बने नाले और सड़क एक हो जाते हैं। पूरा इलाका तालाब में तब्दील हो जाता है। नाला कहां है और सड़क कहां, पता ही नहीं चलता। नतीजा, लोग इसमें गिरकर हादसे का शिकार हो रहे हैं। ऐसा ही एक खतरनाक नाला मदिया कटरा स्थित मानसिक स्वास्थ्य केंद्र के पास से गुजर रहा है। यह नाला पूरी तरह टूटा पड़ा है और कई जगह से खुला हुआ है। इस पर न तो कोई स्लैब है और न ही कोई बैरिकेडिंग। स्थानीय लोगों ने बताया कि बारिश में यह नाला दिखाई नहीं देता। सड़क पर 3 से 4 फीट तक पानी भर जाता है। पानी में नाला छिप जाता है। रात के समय अंधेरा होने से खतरा और बढ़ जाता है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों का कहना है कि कई बार नगर निगम से शिकायत की जा चुकी है। नाले को पत्थर या स्लैब से ढकने की मांग की गई है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। अधिकारी सिर्फ आश्वासन देकर चले जाते हैं। शहर के कई अन्य इलाकों में भी यही हाल है। बोदला, ट्रांस यमुना और पुराने शहर में कई जगह नाले खुले पड़े हैं। नगर निगम की लापरवाही के कारण लोग अपनी जान जोखिम में डालकर चलने को मजबूर हैं। लोगों ने मांग की है कि हादसों को रोकने के लिए जल्द से जल्द सभी खुले नालों को ढका जाए और सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं।
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आगरा में खुले नाले बन रहे हादसों का कारण:तीन मौतों के बाद भी नहीं जागा लापरवाह नगर निगम प्रशासन, मदिया कटरा पर भी टूटा और खुला पड़ा नाला