अविमुक्तेश्वरानंद के नेतृत्व में UP में बनेगा 'रामा गोधाम':गोरखपुर में प्रभारी बोले- गोमाता को राज्यमाता घोषित करने की मांग तेज होगी


भारत में गाय को राज्यमाता घोषित करने के अभियान के तहत यूपी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के गविष्टि यात्रा के दौरान 403 विधानसभाओ में “रामा गोधाम” की स्थापना किए जाने का निर्णय लिया गया। गोरखपुर प्रतिनिधि एडवोकेट मनीष पांडेय ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अविमुक्तेश्वरानंद के नेतृत्व में 15 अगस्त से 17 अगस्त तक छत्तीसगढ़ के सलधा धाम में ही उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभाओं के सभी रामाधाम प्रभारियों की एक बैठक की गयी। जिसमें सभी को 3 दिनों की विशेष ट्रेनिंग दी गई। जन्माष्टमी से गांव- गांव से शुरू होगा नोट अभियान
मीटिंग में यह तय हुआ कि आने वाले गोपाष्टमी तक इस अभियान को घर घर पहुंचाने के लिए जन्माष्टमी से गांव- गांव में एक नोट अभियान चलाकर जन जन को गोमाता से जोड़ा जाएगा। इसलिए हर गांव से गोप्रेमी, गोदूत, गोवीर की नियुक्ति की जाएगी और प्रत्येक व्यक्ति से एक नोट मांगा जायेगा। प्राप्त रकम से एक दिव्य भव्य ‘रामा गोधाम का निर्माण किया जाएगा। एक लाख आठ हजार गोमाता पहुंचेंगी लखनऊ
उन्होंने बताया कि ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोपाष्टमी के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम दिया है। जिसमें उत्तरप्रदेश के हर गांव से सनातनी लोग एक गोमाता का श्रृंगार कर के शोभायात्रा निकालेंगे और लखनऊ के लिए प्रस्थान करेंगे। प्रदेश से लगभग एक लाख आठ हजार (1,08000) गौमाता गोपाष्टमी के दिन यानि 17 नवंबर को लखनऊ पहुंचेंगी जहां उनका भव्य स्वागत करके सम्मान सहित शोभायात्रा करके गोमाता को राज्यमाता घोषित करने के लिए मांग की जाएगी। इस अभियान के लिए गोरखपुर की ग्रामीण विधानसभा में मनीष पाण्डेय एडवोकेट की नियुक्ति रामा गोधाम प्रतिनिधि के रूप में की गई है। उन्होंने प्रदेश की जनता से अनुरोध की है कि गोमाता को राज्यमाता बनाने और रामा गोधाम के निर्माण के लिए उनका सहयोग करें। 3 मई से शुरू हुई थी गविष्टि यात्रा
मनीष पांडेय ने बताया कि वेदलक्षणा गौमाता के प्राणों की रक्षा के लिए 03 मई से 21 जुलाई 2026 तक पूरे उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभाओं में लगातार 81 दिनों तक चलकर गविष्टि यात्रा पूरी की गई। उसी यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा में वेदलक्षणा गायों को बचाने के लिए एक रामाधाम की स्थापना की घोषणा की गई। हर विधानसभा में रामाधाम प्रभारियों की नियुक्ति शंकराचार्य ने खुद की।

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