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अमेरिका के एक बड़े फैसले ने उत्तर प्रदेश के कारोबारियों की नींद उड़ा दी है। अमेरिका ने भारत समेत दुनिया के 60 देशों से आयात होने वाली वस्तुओं पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत यह कदम ‘जबरन श्रम’ (Forced Labour) के मुद्दे को लेकर उठाया गया है। इस फैसले से उत्तर प्रदेश के एक्सपोर्ट यानी निर्यात पर तगड़ा असर पड़ने की आशंका है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (FIEO) के उत्तर प्रदेश प्रमुख आलोक श्रीवास्तव ने शुक्रवार 11 बजे इस मामले पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है, कि इस अतिरिक्त शुल्क से अमेरिकी बाजार में हमारे उत्पाद महंगे हो जाएंगे, जिससे स्थानीय उद्योगों को कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ेगा। यूपी के इन 7 बड़े जिलों और उद्योगों पर गिरेगी गाज अमेरिका के इस फैसले से उत्तर प्रदेश के कई जिलों के ट्रेडिशनल और मैन्युफैक्चरिंग हब सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। FIEO के मुताबिक, कानपुर के चमड़ा और सैडलरी उद्योग पर इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा नोएडा के रेडीमेड गारमेंट्स एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, मुरादाबाद के पीतल शिल्प, भदोही के कालीन उद्योग, आगरा के फुटवियर कारोबार, वाराणसी के हस्तकरघा वस्त्र और अलीगढ़ के ताला-हार्डवेयर उद्योग की कमर टूट सकती है। इन सभी इलाकों से बड़े पैमाने पर अमेरिका माल भेजा जाता है, इसलिए यहां के कारोबारियों पर इसका सीधा असर दिख सकता है। क्यों उठाया गया यह कदम और क्या होगा असर? अमेरिकी प्रशासन ने यह कार्रवाई ‘जबरन श्रम’ से जुड़ी जांच के दायरे में आने वाले देशों पर की है। इस नई व्यवस्था के तहत भारत के अलावा अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कनाडा, मैक्सिको, पाकिस्तान और ब्रिटेन जैसे देशों पर भी 10% सेक्शन 301 शुल्क लागू कर दिया गया है। अतिरिक्त टैरिफ लगने से अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान की कीमत बढ़ जाएगी। इससे खरीदार दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं, जिससे हमारे निर्यातकों के ऑर्डर कम होने का खतरा पैदा हो गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि यदि यह शुल्क अन्य प्रतिस्पर्धी देशों पर भी समान रूप से लागू रहता है, तो भारतीय कारोबारियों पर नुकसान का असर थोड़ा सीमित रह सकता है। FIEO की सलाह, क्वालिटी सुधारें और नए बाजार तलाशें
इस चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए FIEO ने उत्तर प्रदेश के सभी निर्यातकों को सलाह दी है कि वे अपनी लागत घटाने, क्वालिटी सुधारने और समय पर डिलीवरी देने पर पूरा जोर दें। इसके साथ ही, सिर्फ अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय यूरोप, मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट), अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे उभरते बाजारों में अपने कारोबार का दायरा बढ़ाने की अपील की गई है। साथ ही, सप्लाई चेन को अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के मुताबिक रखने की हिदायत भी दी गई है। फिलहाल, केंद्र सरकार अमेरिकी प्रशासन के साथ बातचीत कर रही है ताकि इस समस्या का कोई समाधान निकल सके और भारतीय कारोबारियों के हितों की रक्षा हो सके।
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अमेरिका के 10% अतिरिक्त टैरिफ का झटका:कानपुर-नोएडा समेत यूपी के इन 7 बड़े उद्योगों के एक्सपोर्ट पर संकट, बढ़ेगी मुश्किल