भोपाल के यूनिवर्सिटी कैंपस में 'स्मैक की पुड़िया':गार्ड्स ही ड्रग्स सप्लायर, पूछा-दम चाहिए तो बताओ; तस्करों का पीछा कर राजस्थान तक पहुंचा भास्कर रिपोर्टर; पार्ट-1

जब भी माल चाहिए, यहीं आ जाना। मैं मोबाइल नहीं रखता और न ही मोबाइल पर कोई डील करता हूं। ये ऑफर भोपाल की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी के सिक्योरिटी गार्ड ने भास्कर रिपोर्टर को दिया। यहां माल से मतलब ‘स्मैक की पुड़िया’ है। इस यूनिवर्सिटी के ज्यादातर गार्ड्स ड्रग्स सप्लायर यानी ड्रग्स पैडलर हैं। उन्हें…

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