नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात की हाईकोर्ट ने दी अनुमति:22 सप्ताह का था गर्भ, KGMU को दिया सुरक्षित प्रक्रिया का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 15 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को 22 सप्ताह का गर्भ गिराने की अनुमति दे दी है। न्यायालय ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) स्थित गांधी मेमोरियल एंड एसोसिएटेड हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को सुरक्षित तरीके से गर्भपात सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने अपने आदेश में यह…

Read More

किशोर न्याय कानून बाल अपराध में सर्वोपरि-हाईकोर्ट:याची के विरुद्ध केस कार्यवाही रद्द, कानून के मुताबिक कार्यवाही की छूट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किशोर न्याय एक्ट, 2015 सामान्य आपराधिक कानूनों पर प्रभावी है। यदि कोई आरोपी घटना की तिथि पर किशोर है और एफआईआर गंभीर अपराध की है, तो उसके खिलाफ नियमित एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकलपीठ ने औरैया जिले के…

Read More

2 साल में दूसरा मातृत्व अवकाश संभव:लखनऊ हाईकोर्ट ने कहा- वित्तीय हैंडबुक मातृत्व लाभ कानून से ऊपर नहीं हो सकती

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पहली मातृत्व अवकाश के बाद दो साल के भीतर दूसरा मातृत्व अवकाश लिया जा सकता है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वित्तीय हैंडबुक के प्रावधान मातृत्व लाभ कानून से ऊपर नहीं हो सकते। यह आदेश न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ…

Read More

दहेज हत्या- क्रूरता साबित होने पर ही अपराध:लखनऊ हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ कीमती वस्तुओं की मांग से नहीं होगी सजा

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दहेज हत्या से संबंधित एक महत्वपूर्ण निर्णय पारित किया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल कीमती वस्तुओं या संपत्ति की मांग से दहेज हत्या का अपराध तब तक नहीं माना जाएगा, जब तक मृतक महिला पर उत्पीड़न या क्रूरता की घटनाओं की स्पष्ट कड़ियां सिद्ध न हों। न्यायालय…

Read More

पति की मृत्यु पर एक्स-पार्टी (एकतरफा) तलाक रद्द नहीं:कोर्ट ने कहा, पति या पत्नी की मृत्यु के बाद वैवाहिक विवाद समाप्त हो जाता है

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पति या पत्नी की मृत्यु के बाद एक्स-पार्टी (एकतरफा) तलाक के डिक्री को रद्द नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मुकदमा आगे नहीं बढ़ सकता और इसे पुनर्जीवित करना कानूनन संभव नहीं है। जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर…

Read More