तारीख पर तारीख में निकल गए 34 साल:जज वादी और वकील आरोपी; कोर्ट का फैसला 34 साल बाद आया; सबूतों के अभाव में दोनों आरोपी बरी
‘तारीख पर तारीख’ का दौर जब सिस्टम की लापरवाही से जुड़ जाए, तो इंसाफ की आस भी दम तोड़ने लगती है। बुलंदशहर की अदालत से आया एक फैसला पूरे न्यायिक और अभियोजन तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जिस मुकदमे में वादी खुद एक न्यायिक मजिस्ट्रेट थे और कटघरे में वकील, उसका अंतिम…