Maharana Pratap Untold Story: Rajput Revolution History

“धरम रहसी-रहसी धरा, खप जासी खुरसाण। . अमर विसम्बर ऊपरे, राख नहच्चो राण।।” इस दोहे का अर्थ है- ‘धर्म और धरती हमेशा बने रहेंगे, लेकिन ये विदेशी आक्रमणकारी (खुरसाण) एक दिन समाप्त हो जाएंगे।’ ये दोहा मुगल सेनापति रहीम खान-ए-खाना (मिर्जा खां) ने मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप के लिए लिखा था। कारण था- हल्दीघाटी…

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