बलिया|रितेश मिश्रा|पुष्पेंद्र तिवारी1 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

‘सर, इन सब चीजों से मेरा कोई वास्ता नहीं है। उन लोगों ने मेरी बात नहीं मानी। डरा-धमकाकर कहते रहे कि बोल- तूने कैसे किया? मुझे कोलकाता ले जाया गया। हर समय डर लगता था कि कहीं मेरा फर्जी एनकाउंटर न कर दें, क्योंकि मुझे वहां की भाषा नहीं आती। फिर CBI आई। उसने मुझे दिलासा दिया। कहा- अगर तुम गलत नहीं हो तो तुम्हारे साथ गलत नहीं होगा।’
यह सब कहते हुए बलिया के राज सिंह की आंखें भर गईं। उन्हें बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की हत्या में एसओजी ने संदिग्ध शूटर के तौर पर 11 मई को अयोध्या से उठाया था। फिर बंगाल पुलिस साथ ले गई थी।
राज सिंह वहां 10 दिन पुलिस, सीआईडी और सीबीआई की कस्टडी में रहे। फिर उन्हें CBI कोर्ट ने बरी कर दिया। राज गुरुवार को अपने घर पहुंचे। मां से गले लिपट गए और दोनों रोने लगे। उनके घर लौटने से उत्सव जैसा माहौल है।
दैनिक भास्कर टीम भी राज सिंह के घर पहुंची, उनसे बातचीत की। राज सिंह ने बताया- यह सब गलतफहमी में हुआ है। बंगाल पुलिस को मुख्य शूटर राजकुमार सिंह को उठाना था। लेकिन, नाम में कंफ्यूजन की वजह से मुझे उठा लिया।

राज सिंह ने अपनी मां को गले लगा लिया। मां और राज सिंह दोनों की आंखें भर आईं।
राज सिंह ने हमारे हर सवाल का खुलकर जवाब दिया, पढ़िए
सवाल: आपको किस तरह और कहां से हिरासत में लिया गया? राज सिंह: मैं 10 मई को अयोध्या रामजी के दर्शन करने गया था। वहां मुझे एसओजी टीम ने गिरफ्तार कर लिया। कोई हत्या हुई थी, उसी के आरोप में। मैं अपने परिवार के फंक्शन में बिजी था, इसलिए न्यूज पर ध्यान नहीं दे रहा था। उन्हीं लोगों ने बताया कि किसी PA की हत्या हुई है। उसी केस में मुझे गिरफ्तार किया गया।
मैं एसओजी टीम से बोलता रह गया कि सर, इन सब चीजों से मेरा कोई वास्ता नहीं है। लेकिन, उन लोगों ने मेरी बात नहीं मानी। डरा-धमकाकर कहते रहे कि बोल- तूने कैसे किया, क्या किया? जबकि मैंने हर एक सबूत दे दिया कि मैं यहीं था, कहीं नहीं गया। लेकिन, वो लोग नहीं माने और मुझे कोलकाता भेज दिया।
सवाल: कोलकाता जाने के बाद आपको वहां पुलिस के हवाले किया गया या सीबीआई के? राज सिंह: वहां मुझे पहले कोलकाता पुलिस के हवाले किया गया। वहां पर सीआईडी भी थी। सीआईडी ब्यूरो ऑफिस में मुझे रखा गया था। शायद 3 दिन रखा गया। मुझे डर लगता था कि कहीं मेरा फर्जी एनकाउंटर ना कर दें, क्योंकि वहां की भाषा मुझे नहीं आती।
वो लोग आपस में क्या बात करते थे, समझ में नहीं आता था। मुझे अपराधी की नजर से देखते थे। उनकी मानसिकता समझ में आ जाती थी। उससे मैं बहुत डर गया था। लेकिन, फिर सीबीआई आई। सीबीआई ने मुझे दिलासा देते हुए कहा कि अगर तुम गलत नहीं हो तो तुम्हारे साथ गलत नहीं होगा।

राज सिंह ने कहा कि मुझे लगा कि मेरा फर्जी एनकाउंटर हो जाएगा।
सवाल: सीबीआई कितने दिनों बाद आपके पास पहुंची? राज सिंह: 3 दिन बाद सीबीआई मुझसे मिली। उसके बाद मुझे कोर्ट ले जाया गया।
सवाल: सीबीआई ने आपसे क्या पूछताछ की? आपने क्या एविडेंस दिया? राज सिंह: सीबीआई ने मुझसे पूछा कि 6 तारीख को तुम कहां-कहां थे? मैंने बताया कि मैं घर पर था। फिर शाम 6 बजे अपने हॉस्पिटल गया था। वहां सीसीटीवी फुटेज में भी दिख रहा हूं। फिर मैं मान्यवर शोरूम गया, वहां शॉपिंग की। वहां भी सीसीटीवी फुटेज में हूं। फिर काला जोन गया, वहां की भी फुटेज है। उसके बाद ड्रेसलैंड मॉल गया, जो मालगोदाम के पास है। वहां से मैंने करीब 2800 रुपए का कुर्ता-पायजामा खरीदा। यही सारे सबूत मैंने सीबीआई को दिए।
सवाल: आपकी गिरफ्तारी किस आधार पर हुई? क्या पुलिसवालों को गलतफहमी हुई? राज सिंह: यह हम लोगों का दुर्भाग्य है कि भाजपा की अच्छी सरकार होने के बावजूद प्रशासन की गलतफहमी और बदतमीजी के चलते मुझे उठा लिया गया। अपराधी कोई और था, दोषी कोई और था, लेकिन मुझे पकड़ लिया गया। मैं गलतफहमी का शिकार बन गया। उसके बाद जोर-जबरदस्ती भी की गई। आरोप लगाए गए कि तुमने यह किया, वो किया। इससे मेरी इज्जत और मानसिक स्थिति को बहुत ठेस पहुंची। समाज में मेरी छवि बिगाड़ी गई।
सवाल: सरकार से क्या कहना चाहेंगे? राज सिंह: मैं मुख्यमंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि वहां की एसओजी टीम पर जांच बैठाई जाए कि ऐसे कितने लोगों को फर्जी तरीके से फंसाया गया है? कितनों को गोली मार दी गई है?

राज सिंह की मां जामवंती सिंह ने हाथ जोड़कर कहा कि सीबीआई के अधिकारियों और जांच से जुड़े सभी लोगों का मैं दिल से धन्यवाद करती हूं।
सवाल: इस दौरान आपके परिवार पर क्या गुजरी? क्या घरवालों से बातचीत हो पाती थी? राज सिंह: 10 दिन कैसे कटे, यह मैं ही जानता हूं। मेरे परिवार के दिमाग में बस यही चलता था कि अगर मैं गलत नहीं हूं, तो मेरे साथ गलत नहीं होगा। परिवार को डर था कि कहीं प्रशासन उन्हें परेशान न करे और गलत आरोप न लगा दे। ये 10 दिन मेरी जिंदगी के सबसे कष्टदायक दिन थे। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि किसी की जिंदगी में ऐसा समय ना आए।
सवाल: अब परिवार के साथ कैसा महसूस कर रहे हैं? राज सिंह: यह बात मैं बयां नहीं कर सकता। मेरी मां मेरे सामने हैं, मेरी बहन है, मेरा परिवार है। इससे ज्यादा खुशी मेरी जिंदगी में कुछ नहीं हो सकती।
सवाल: आप राजनीति में सक्रिय रहते हैं। ब्लॉक प्रमुख चुनाव लड़ने की भी चर्चा थी? राज सिंह: मैं ब्लॉक प्रमुख चुनाव अब नहीं लड़ना चाहता। मैं जनता की सेवा करना चाहता हूं। जनता मुझे जैसा मौका देगी, जैसा आदेश देगी, उसी के अनुरूप काम करूंगा।

तस्वीर राज के फेसबुक अकाउंट से ली गई है। इसमें वह मंत्री दयाशंकर सिंह के साथ दिख रहे हैं।
अब पढ़िए राज की मां ने क्या कहा
राज की मां जामवंती सिंह कहती हैं- मैं बता नहीं पाऊंगी कि मैं कैसा महसूस कर रही हूं। 11-12 दिन बाद आज मेरा बेटा मेरे सामने है। एक मां कैसे बयान करे कि वह क्या महसूस कर रही है।
जब राज को गिरफ्तार किया गया था, तबसे मुझे दिन-रात चैन नहीं था। मैं गली-गली भटकती रही। हर जगह जाकर यह साबित करने की कोशिश करती रही कि मेरा बेटा निर्दोष है। मैंने हर एविडेंस जुटाया और जो भी सीबीआई के अधिकारी आए, उनके सामने सारे सबूत रखे। आज मेरा बेटा निर्दोष साबित हुआ है।
मैं बोलते-बोलते थक गई थी कि मेरा बेटा निर्दोष है, निर्दोष है, निर्दोष है। लेकिन, कोई सुनने को तैयार नहीं था। मैं एक बात और कहना चाहूंगी। अयोध्या की एसओजी टीम ने मेरे और मेरे बेटे के साथ बहुत अन्याय किया। मैं बार-बार पूछती रही कि आखिर क्या हुआ है, कुछ सच्चाई तो बताइए।
मैं तीर्थ और दर्शन करने गई थी। वहां ऐसा क्या हो गया कि मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया गया। कोई मेरी बात सुनने को तैयार नहीं था। यहां तक कि मेरे साथ कोई महिला पुलिसकर्मी भी नहीं थी। मुझे गाड़ी में बैठाकर महिला थाने ले जाया गया।

राज ने अपने फेसबुक अकाउंट पर भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह के साथ भी रील पोस्ट की है।
मैं हाथ जोड़ती रही, पैर पड़ती रही कि मेरा बेटा निर्दोष है, पहले जांच कर लीजिए। मेरा राज मेरे साथ था, उसने कुछ नहीं किया है। लेकिन, कोई सुनने को तैयार नहीं था। पूरी रात मैं पागलों की तरह भगवान से प्रार्थना करती रही कि हे प्रभु, इंसाफ कीजिए। मैंने आपके दर्शन किए हैं, हमारे साथ अन्याय हो रहा है। अगर यहां न्याय नहीं मिला और सत्य की जीत नहीं हुई, तो मैं आपकी चौखट पर आकर जान दे दूंगी।
भगवान ने मेरी सुन ली। सच्चाई सामने आई और आज मेरा बेटा मेरे सामने है। सीबीआई के अधिकारियों और जांच से जुड़े सभी लोगों का मैं दिल से धन्यवाद करती हूं। सारे एविडेंस देखने के बाद सच्चाई सामने आई। उन्होंने मेरे बेटे को बदनाम होने से बचा लिया, मेरे परिवार को बचा लिया।
लोग मेरी परवरिश और मेरे दूध पर सवाल उठा रहे थे। कहते थे कि आपने बेटे को बिगाड़ा है। लेकिन, आज अयोध्या नरेश भगवान श्रीराम ने सत्य को सामने ला दिया। पूरी दुनिया याद रखेगी कि एक मां अपने बेटे के लिए क्या महसूस करती है। मैं अपनी भावनाएं शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकती।

राज की मां ने कहा- भगवान ने मेरी सुन ली। सच्चाई सामने आई और आज मेरा बेटा मेरे सामने है।
अब पढ़िए जो बहन ने कहा-
राज की बहन दीपशिखा सिंह ने कहा- मैं प्रयागराज हाईकोर्ट में थी। मैं शुरू से लेकर आखिर तक यही कह रही थी कि मेरा भाई राज निर्दोष है। आज वह निर्दोष साबित हुआ और मेरे सामने है। मेरे पास जो भी सबूत थे, मैंने आप लोगों के माध्यम से हर जगह दिखाए। वह कहां-कहां गया था, किन मार्केट में गया था, सब कुछ सामने रखा। आज मेरा भाई मेरे सामने है, क्योंकि मैं सत्य के साथ थी।
कुछ लोग मेरे भाई को अपराधी साबित करने में लगे थे। कोई उसे डॉन बता रहा था, कोई कह रहा था कि हम लोग मर्डर करने वाले परिवार से हैं। उस पर तरह-तरह के आरोप लगाए गए। अंडे वाले मामले में भी मेरे भाई का नाम उछाला गया और उसे बदनाम किया गया। जबकि, उस मामले में भी उसका कोई कसूर नहीं था। हर गलत काम में मेरे भाई का नाम जोड़ दिया जाता है, जबकि वह गलत नहीं है।

राज की बहन दीपशिखा ने कहा- मैं शुरू से लेकर आखिर तक यही कह रही थी कि मेरा भाई राज निर्दोष है।
आज भाई हमारे पास है। मेरी मां की परवरिश पर बहुत सवाल उठाए गए, लेकिन मेरी मां की परवरिश इतनी खराब नहीं हो सकती। मेरे दोनों भाई, मैं और मेरी मां हमेशा सत्य के रास्ते पर रहे हैं। अब मेरा भाई हमारे सामने है। आज के बाद कोई भी मेरी मां की परवरिश या मेरे भाई के बारे में गलत बात न करे।
मैं यूपी पुलिस और एसओजी टीम से कहना चाहती हूं कि किसी को भी उठाने से पहले पूरी जांच कर लें कि वह सही है या गलत। बिना जांच किसी को प्रताड़ित करने या मारने का किसी को हक नहीं है। मेरा भाई 10 दिनों में जितनी तकलीफ झेल चुका है, उसे मैं अच्छी तरह जानती हूं। मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि जो सही है, उसे सही माना जाए और जो गलत है, उसे सजा दी जाए।
6 मई को हुई थी बंगाल सीएम के पीए की हत्या
बंगाल चुनाव के नतीजे आने के 2 दिन बाद 6 मई को 42 साल के चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने रथ की कार रुकवाकर कई राउंड फायरिंग की थी। रथ को सीने और पेट में तीन गोलियां लगी थीं। वारदात उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम इलाके में हुई थी।

————————–
ये खबर भी पढ़ेंः-
शुभेंदु PA हत्याकांड- राज सिंह को क्लीनचिट मिली, नाम के कंफ्यूजन में उठाया था; अब हथियार सप्लायर को बलिया से गिरफ्तार किया

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में अरेस्ट बलिया के राज सिंह को क्लीन चिट मिल गई है। राज सिंह को नाम के कंफ्यूजन में अरेस्ट किया गया था। सीबीआई के अनुसार, मुख्य शूटर राजकुमार सिंह के भ्रम में राज सिंह को गलती से अरेस्ट कर लिया गया था। मुजफ्फरनगर के छपार टोल प्लाजा से बलिया के ही राजकुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया। पढ़ें पूरी खबर…
