surat migrant workers return home dut to gas shortage inflation

सूरत13 मिनट पहले

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सूरत रेलवे स्टेशन पर मौजूद प्रवासी मजदूर। - Dainik Bhaskar

सूरत रेलवे स्टेशन पर मौजूद प्रवासी मजदूर।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का भारत पर असर दिखाई देने लगा है। गुजरात में रसोई गैस की कमी के चलते स्ट्रीट फूड की दुकानें, छोटे होटल-ढाबे बंद होने से इनके मालिक बेरोजगार होने लगे हैं।

इसके अलावा यूपी-बिहार के श्रमिकों और हजारों स्टूडेंट्‌स को भी अपने घर लौटना पड़ रहा है। इसके चलते सूरत स्टेशन पर लंबी कतारें लगी हुई हैं।

इस मौके पर भास्कर रिपोर्टर ने सूरत के रेलवे स्टेशन पर मौजूद कुछ लोगों से बात की। लोगों ने बताया- छोटे सिलेंडर के लिए जो गैस आम दिनों में ₹100 किलो तक में मिल जाती थी, वह अब ₹300-₹400 रुपए किलो बिक रही है।

वहीं, बड़े सिलेंडर के रेट तो ₹5 हजार तक पहुंच गए हैं। फ्लैट में रहने के चलते वे चूल्हा जला नहीं सकते। इसके चलते उनके सामने भूखों मरने की नौबत आ गई है।

सूरत के रेलवे स्टेशनों पर भीड़ की 3 तस्वीरें…

सूरत रेलवे स्टेशन पर प्रवासी मजदूरों की भीड़।

सूरत रेलवे स्टेशन पर प्रवासी मजदूरों की भीड़।

मजदूरों का कहना है कि एलपीजी सिलेंडर 5 हजार रुपए का मिल रहा है।

मजदूरों का कहना है कि एलपीजी सिलेंडर 5 हजार रुपए का मिल रहा है।

सूरत रेलवे स्टेशन के बाहर अपनी ट्रेन का इंतजार करते प्रवासी मजदूर।

सूरत रेलवे स्टेशन के बाहर अपनी ट्रेन का इंतजार करते प्रवासी मजदूर।

ज्यादातर लोगों के पास गैस कनेक्शन नहीं

टेक्सटाइल और डायमंड हब होने के चलते सूरत शहर में यूपी-बिहार में लाखों की संख्या में श्रमिक रहते हैं। ये लोग रोज कमाकर खाने वाले हैं और छोटे किराये के कमरों में रहते हैं।

इनमें से ज्यादातर लोगों के पास आधिकारिक गैस कनेक्शन नहीं होता है। इनके परिवार छोटे गैस सिलेडर पर ही निर्भर हैं। लेकिन, अब गैस की कमी के चलते इनके चूल्हे नहीं जल पा रहे हैं। और लोग अपने गांव वापस लौट रहे हैं।

बिहार के मजदूर बोले- पड़ोसी मदद करते, लेकिन कबतक

दैनिक भास्कर से हुई बातचीत में बिहार के एक प्रवासी मजूदर ने कहा- जब से गैस की कमी शुरू हुई है, हमें खाने-पीने में दिक्कत हो रही है। गैस खत्म होने पर हमारे आस-पास के लोग हमारी हालत देखकर कभी-कभी हमें खाना दे देते हैं, लेकिन हम कब तक दूसरों पर निर्भर रह सकते हैं? वे एक-दो बार ही मदद कर सकते हैं, इससे ज्यादा नहीं।

इसलिए हम गांव जा रहे हैं और वहां जाकर काम ढूंढेंगे। कंपनी के मालिकों का कहना है कि वे भी गैस का इंतजाम नहीं करवा पा रहे हैं। इसलिए हमने कंपनी को भी बता दिया है कि हम गांव जा रहे हैं। हमारे पास राशन तो है, लेकिन खाना पकाने के लिए गैस नहीं।

बिहार जा रहीं महिला बोलीं- काम ठप्प होने लगा है

बिहार लौट रहीं नूतनबेन ने कहा- गैस की समस्या के कारण मैं अपने बच्चों के साथ भागलपुर जा रही हूं। गैस की कमी से यहां कामकाज भी ठप होने लगा है। पिछले तीन-चार दिनों से बहुत परेशानी हो रही है। गैस नहीं होने पर बच्चों के लिए किस तरह खाने का इंतजाम कर रही थी, यह सिर्फ मैं ही जानती हूं।

दो-तीन बार तो पड़ोसियों के घर जाकर थोड़ा बहुत खाना पकाया, लेकिन ऐसे रोज तो नहीं कर सकते। पड़ोसियों के घर भी गैस खत्म होने लगी है। जब सब कुछ ठीक हो जाएगा तब हम लौट आएंगे।

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