Sanju Samson Team India Selection Controversy

6 घंटे पहले

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संजू सैमसन की टीम इंडिया में जगह को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने उनके लगातार टीम में आने-जाने की स्थिति पर चिंता जताई है। अश्विन के मुताबिक, टी-20 वर्ल्ड कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बनने के बाद भी अगर किसी खिलाड़ी को अपनी जगह को लेकर भरोसा न हो, तो यह उसके लिए मानसिक रूप से मुश्किल हो सकता है।

इंग्लैंड सीरीज के बाद संजू को जिम्बाब्वे दौरे की टी-20 टीम में जगह नहीं मिली थी। हालांकि चयनकर्ताओं ने इसे ड्रॉप किए जाने के बजाय आराम बताया था। इसके बाद अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में उनकी टीम में वापसी हुई। दिल्ली में खेले गए पहले टी-20 में संजू 8 गेंदों पर 10 रन बनाकर आउट हुए। भारत ने अभिषेक शर्मा की 82 रन की पारी और अर्शदीप सिंह के 3 विकेट की मदद से यह मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया।

वर्ल्ड कप में 321 रन बनाया

संजू ने 2026 टी-20 वर्ल्ड कप में भारत के लिए सबसे ज्यादा 5 पारियों में 321 रन बनाए। उनका औसत 80.25 और स्ट्राइक रेट 199.37 रहा। ग्रुप मैच में वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 97 रन के बाद उन्होंने सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 89 और फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी 89 रन बनाए। फाइनल में उनकी पारी के दम पर भारत ने 255/5 का स्कोर बनाया और न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर तीसरी बार टी-20 वर्ल्ड कप जीता।

फिर तीन मैच में नहीं चले तो टीम से बाहर

वर्ल्ड कप के बाद संजू की स्थिति तेजी से बदली। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर कुछ पारियों में रन नहीं बना पाने के बाद उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी-20 की प्लेइंग-11 से बाहर कर दिया गया। उनकी जगह 15 साल के वैभव सूर्यवंशी को मौका मिला।

अब संजू सैमसन के सामने टीम में जगह बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है। वैभव ने इंग्लैंड दौरे पर टी-20 इंटरनेशनल डेब्यू किया। इसके बाद जिम्बाब्वे दौरे पर उन्होंने तीन मैचों में दो अर्धशतक लगाए। सीरीज के तीसरे टी-20 में वैभव ने 81 रन की पारी खेली और अपने प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द सीरीज चुने गए।

अश्विन बोले- संजू सोचते होंगे, मेरी स्थिति कोई क्यों नहीं समझता

अश्विन का सवाल इसी चयन प्रक्रिया पर है। उनका मानना है कि संजू के नजरिए से देखें तो स्थिति बेहद कठिन है। अगर वह वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करने के बाद एक-दो मैच में असफल होते हैं और बाहर बैठ जाते हैं, तो उनके मन में यह सवाल आना स्वाभाविक है कि उनकी स्थिति को कोई क्यों नहीं समझ रहा।

अश्विन ने कहा कि संजू ने 2014 में इंटरनेशनल क्रिकेट शुरू किया था, लेकिन इतने साल के बाद भी उन्हें टीम में अपनी जगह को लेकर स्थायी भरोसा नहीं मिला। उनके मुताबिक खिलाड़ी के लिए यह स्थिति मानसिक रूप से मुश्किल हो सकती है।

संजू इंग्लैंड सीरीज के 2 टी-20 में 28 रन ही बना सके थे।

संजू इंग्लैंड सीरीज के 2 टी-20 में 28 रन ही बना सके थे।

दबाव संजू के प्रदर्शन का है या वैभव के बाहर बैठने का

अश्विन ने एक और दिलचस्प सवाल उठाया। उनका कहना है कि जब संजू अच्छा खेलते हैं तो लोग कहते हैं कि उन्हें पहले ही टीम में बनाए रखना चाहिए था। लेकिन जब वह फेल होते हैं तो उनकी अस्थिरता पर सवाल उठते हैं।

अब इसमें वैभव का नाम जुड़ गया है। ऐसे में यह साफ नहीं रहता कि संजू पर सवाल उनके अपने प्रदर्शन को लेकर उठ रहे हैं या इसलिए कि उनके खेलने से वैभव को बाहर बैठना पड़ रहा है। अश्विन के मुताबिक, संजू की जगह को लेकर यही अनिश्चितता उनके लिए सबसे मुश्किल हिस्सा हो सकती है। ——————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… भारत-अफगानिस्तान दूसरा टी-20 आज:चोटिल वरुण की जगह रवि बिश्नोई को मिल सकता है मौका; सीरीज में टीम इंडिया 1-0 से आगे

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